पेपरलेस रजिस्ट्री पर कांग्रेस का सरकार पर हमला, पंकज उपाध्याय बोले- ‘आम लोगों की जमीन की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं’
ऑनलाइन रजिस्ट्री व्यवस्था से किसान, ग्रामीण, जमीन मालिक, कातिब और स्टांप वेंडर परेशान : जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से तत्काल समीक्षा की मांग की


न्यूज विज़न। बक्सर
बिहार में रजिस्ट्री कार्यालयों में लागू की जा रही ऑनलाइन एवं पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर बक्सर जिला कांग्रेस कमेटी ने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जिला कांग्रेस अध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था को पर्याप्त तैयारी और व्यापक जनहित की समीक्षा के बिना लागू किए जाने से आम जमीन मालिक, किसान, ग्रामीण, डीड राइटर, कातिब एवं स्टांप वेंडर समेत रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पंकज उपाध्याय ने कहा कि जमीन की रजिस्ट्री आम आदमी के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रियाओं में से एक है। ऐसे में इस पूरी प्रक्रिया को तकनीकी रूप से जटिल बनाने और भौतिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने से भविष्य में जमीन से जुड़े विवाद, धोखाधड़ी और स्वामित्व संबंधी समस्याओं की आशंका बढ़ सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि नई व्यवस्था के व्यावहारिक प्रभावों की तत्काल समीक्षा की जाए।
अंग्रेजी में डिजिटल डीड से ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत डिजिटल डीड तैयार की जा रही है। कई मामलों में दस्तावेज अंग्रेजी भाषा में होने के कारण ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए उसे समझना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति को यह स्पष्ट रूप से पता ही नहीं होगा कि उसने कितनी जमीन, किस व्यक्ति को और किन शर्तों पर बेची है, उससे दस्तावेज की पूरी समझ और पारदर्शिता की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि जमीन की खरीद-बिक्री में एक छोटी सी गलती भी भविष्य में बड़ा विवाद खड़ा कर सकती है। इसलिए दस्तावेज को ऐसी भाषा और प्रारूप में उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जिसे आम जमीन मालिक आसानी से पढ़ और समझ सके।
पुरानी व्यवस्था में सभी पक्षों की मौजूदगी से रहती थी पारदर्शिता
पंकज उपाध्याय ने कहा कि पहले रजिस्ट्री की प्रक्रिया में क्रेता-विक्रेता, गवाह, पहचानकर्ता और कातिब की मौजूदगी में दस्तावेज तैयार किया जाता था। हस्ताक्षर समेत अन्य जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जाती थीं और पूरी प्रक्रिया में संबंधित पक्षों की प्रत्यक्ष भागीदारी रहती थी।
उन्होंने कहा कि अब पेपरलेस व्यवस्था में भौतिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में आम लोगों के बीच भविष्य की सुरक्षा को लेकर स्वाभाविक चिंता पैदा हो रही है। जमीन जैसे संवेदनशील विषय में रिकॉर्ड की स्थायित्व और आसानी से उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है।
‘कांग्रेस तकनीक के खिलाफ नहीं, लेकिन जनता की परेशानी स्वीकार नहीं’
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी तकनीकी व्यवस्था के विरोध में नहीं है। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए होना चाहिए, न कि आम जनता के लिए नई परेशानी खड़ी करने के लिए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि डिजिटल रजिस्ट्री व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, सरल और आम लोगों की समझ के अनुरूप बनाया जाए। साथ ही क्रेता और विक्रेता को रजिस्ट्री के दस्तावेज की स्पष्ट एवं समझने योग्य प्रति उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
कातिब, डीड राइटर और स्टांप वेंडरों के रोजगार का भी उठाया मुद्दा
पंकज उपाध्याय ने रजिस्ट्री प्रक्रिया से लंबे समय से जुड़े डीड राइटरों, कातिबों और स्टांप वेंडरों के रोजगार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से इन लोगों के रोजगार और भविष्य पर भी संकट उत्पन्न हो रहा है।
उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलाव के साथ सरकार को उन हजारों लोगों के रोजगार और आजीविका की भी चिंता करनी चाहिए, जो वर्षों से रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े हुए हैं। सरकार को संबंधित लोगों के साथ संवाद कर ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, जिससे तकनीकी सुधार के साथ उनके हितों की भी रक्षा हो सके।
भू-माफियाओं को फायदा पहुंचने की आशंका पर सरकार दे जवाब
पंकज उपाध्याय ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था में पर्याप्त सुरक्षा और सत्यापन की व्यवस्था नहीं रही तो इसका दुरुपयोग करने की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने की मांग की कि डिजिटल डीड में जमीन की मात्रा, सीमांकन, विक्रेता की सहमति और अन्य महत्वपूर्ण विवरणों की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से ठोस प्रावधान किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीकी खामी का खामियाजा आम जमीन मालिक को नहीं भुगतना चाहिए। यदि भविष्य में किसी व्यक्ति के जमीन संबंधी दस्तावेज में गड़बड़ी होती है तो उसे वर्षों तक न्यायालय और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।
कांग्रेस ने सरकार के सामने रखीं कई मांगें
जिला कांग्रेस अध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने बिहार सरकार एवं संबंधित विभाग से मांग की कि—
पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था की तत्काल समीक्षा की जाए।
क्रेता-विक्रेता को रजिस्ट्री दस्तावेज की स्पष्ट और समझने योग्य प्रति उपलब्ध कराई जाए।
ग्रामीण एवं कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए पूरी प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
दस्तावेजों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ रोकने के लिए मजबूत डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
डीड राइटरों, कातिबों और स्टांप वेंडरों के रोजगार की सुरक्षा के लिए ठोस पहल की जाए।
नई व्यवस्था से उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए आम जनता और रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े लोगों से संवाद किया जाए।
जमीन के दस्तावेजों में छेड़छाड़ और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए मजबूत सत्यापन प्रणाली विकसित की जाए।
‘जनता की जमीन प्रयोग का विषय नहीं’
पंकज उपाध्याय ने कहा कि जनता की जमीन और संपत्ति से जुड़ा मामला किसी भी कीमत पर प्रयोग का विषय नहीं हो सकता। सरकार को तकनीकी बदलाव के साथ आम लोगों की सुविधा, सुरक्षा और भविष्य के कानूनी अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस आम लोगों के अधिकारों और उनकी संपत्ति की सुरक्षा के लिए लगातार आवाज उठाती रहेगी। यदि सरकार ने आम जनता की समस्याओं और कांग्रेस की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो बक्सर जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किया जाएगा।





