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अब बिना कोर्ट फीस मिलेगा त्वरित न्याय: बक्सर में स्थायी लोक अदालत ने लोगों को बताए उनके अधिकार, बिजली-बीमा से लेकर बैंक और अस्पताल तक के विवाद होंगे हल

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के संवेदीकरण कार्यक्रम में दी गई महत्वपूर्ण जानकारी, जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े मामलों का आपसी सहमति से होगा निःशुल्क और शीघ्र निपटारा, लोगों से अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
आम नागरिकों को सुलभ, त्वरित और निःशुल्क न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विधिक सेवा प्राधिकार अधिनियम, 1987 के प्रावधानों के तहत बुधवार को व्यवहार न्यायालय, बक्सर परिसर में जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा एक विशेष संवेदीकरण एवं जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को स्थायी लोक अदालत की कार्यप्रणाली, अधिकार क्षेत्र तथा इसके माध्यम से मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी देना था, ताकि अधिक से अधिक लोग बिना अनावश्यक कानूनी खर्च और लंबी अदालती प्रक्रिया के अपने विवादों का समाधान करा सकें।

 

कार्यक्रम में स्थायी लोक अदालत, बक्सर के अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह श्रीनेत, अधिवक्ता सदस्य माधव राय एवं सुनील कुमार सिन्हा ने भाग लिया। वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर की सचिव सह अवर न्यायाधीश नेहा दयाल ने आमजन को स्थायी लोक अदालत की उपयोगिता और इसकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्थायी लोक अदालत आम नागरिकों के लिए एक प्रभावी वैकल्पिक विवाद निपटान मंच है, जहां जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े मामलों का बिना किसी कोर्ट फीस के, आपसी सहमति एवं शीघ्रता से समाधान कराया जाता है। इससे लोगों का समय और धन दोनों की बचत होती है, साथ ही अदालतों पर लंबित मुकदमों का बोझ भी कम होता है।

 

किन-किन मामलों का हो सकता है समाधान
स्थायी लोक अदालत, बक्सर के अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह श्रीनेत ने बताया कि आम नागरिक निम्नलिखित विभागों एवं सेवाओं से संबंधित विवादों के समाधान के लिए स्थायी लोक अदालत का सहारा ले सकते हैं—
बिजली एवं जलापूर्ति विभाग से जुड़े विवाद, जैसे बिजली बिल, आपूर्ति में बाधा, पानी की गुणवत्ता एवं आपूर्ति संबंधी शिकायतें।
परिवहन एवं संचार सेवाएं, जिनमें बस, ट्रेन, डाक विभाग तथा बीएसएनएल जैसी टेलीफोन सेवाओं से जुड़े मामले शामिल हैं।
स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित शिकायतें, जैसे अस्पतालों द्वारा अधिक शुल्क वसूली, सेवा में लापरवाही तथा शिक्षण संस्थानों से जुड़े विवाद।
बैंकिंग एवं बीमा से जुड़े मामले, जिनमें बैंक ऋण, नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां (NBFC), बीमा सेवाएं एवं बीमा दावों से संबंधित विवाद शामिल हैं।
अन्य जनोपयोगी सेवाएं, जैसे आवास एवं रियल एस्टेट (रेरा), होल्डिंग टैक्स, जल कर, सार्वजनिक स्वच्छता (कचरा निपटान) तथा वन एवं वन्यजीव विभाग से संबंधित विवाद।

प्री-लिटिगेशन मामलों के निपटारे पर विशेष जोर
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि ऐसे मामले जो अभी अदालत में औपचारिक रूप से दर्ज नहीं हुए हैं, उन्हें भी प्री-लिटिगेशन के रूप में स्थायी लोक अदालत के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। इसमें विशेष रूप से मोटर वाहन दुर्घटना मुआवजा (MACT), ऋण संबंधी विवाद तथा अन्य जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जाती है। इससे संबंधित पक्षों के बीच आपसी सहमति से विवाद समाप्त हो जाते हैं और लंबी न्यायिक प्रक्रिया से बचा जा सकता है।

लोगों से लाभ उठाने की अपील
कार्यक्रम के अंत में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर की सचिव सह अवर न्यायाधीश नेहा दयाल ने जिले के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि वे जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े किसी भी विवाद का सामना कर रहे हैं तो वे व्यवहार न्यायालय, बक्सर स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार कार्यालय से संपर्क कर स्थायी लोक अदालत की इस निशुल्क व्यवस्था का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर नागरिक तक सरल, सस्ता और समयबद्ध तरीके से पहुंचाना ही विधिक सेवा प्राधिकार का उद्देश्य है। इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने और न्याय व्यवस्था को अधिक जनसुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

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