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राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग को लेकर बेल्ट्रॉन कर्मियों ने निकाला रोड मार्च, सरकार को 15 नवंबर तक का अल्टीमेटम

कवलदह पोखरा से किला मैदान तक निकाला मार्च, मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी; चरणबद्ध आंदोलन की बनाई रणनीति

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
बिहार में बेल्ट्रॉन के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्त एवं कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटरों तथा अन्य संविदा कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अब सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। इसी कड़ी में रविवार को बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संघ एवं संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर बक्सर में कर्मियों ने जोरदार रोड मार्च निकालकर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। यह मार्च कवलदह पोखरा से शुरू होकर किला मैदान तक पहुंचा। इस दौरान बड़ी संख्या में शामिल डाटा एंट्री ऑपरेटरों एवं संविदा कर्मियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।

 

कर्मियों की प्रमुख मांगों में उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा प्रदान करना तथा सूचना प्रावैधिकी विभाग, बिहार को उनका नोडल विभाग घोषित करना शामिल है। संघ का कहना है कि वर्षों से विभिन्न सरकारी विभागों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बावजूद कर्मियों को स्थायी भविष्य और सेवा सुरक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लंबे समय से सेवा देने वाले इन कर्मियों के हितों की अनदेखी से उनमें असंतोष बढ़ता जा रहा है। रोड मार्च के दौरान संघ के पदाधिकारियों ने सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि 15 नवंबर 2026 तक उनकी जायज मांगों पर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक एवं लिखित निर्णय नहीं लिया जाता है, तो संयुक्त मोर्चा राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा। आंदोलन की रूपरेखा भी घोषित कर दी गई है।

 

संघ के अनुसार, आंदोलन के प्रथम चरण में सभी कर्मी कार्य दिवसों के दौरान काला बिल्ला लगाकर विरोध दर्ज कराएंगे। दूसरे चरण में धरना-प्रदर्शन, महारैली और आमरण अनशन के माध्यम से सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई जाएगी। इसके बाद तीसरे चरण में दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की जाएगी। यदि इसके बावजूद मांगों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो अंतिम चरण में पूरे बिहार में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। इस अवसर पर बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संघ जिला इकाई, बक्सर के अध्यक्ष इमरान खान एवं उपाध्यक्ष सह संयुक्त मोर्चा के सदस्य शशिकांत ने संयुक्त रूप से कहा कि डाटा एंट्री ऑपरेटर एवं अन्य संविदा कर्मी वर्षों से पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ सरकारी कार्यों में अपना योगदान दे रहे हैं। इसके बावजूद उनके भविष्य की सुरक्षा और सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

उन्होंने सरकार से अपील की कि 15 नवंबर की समयसीमा समाप्त होने से पहले उनकी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए संबंधित अधिकारियों को सकारात्मक कार्रवाई के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। संघ के नेताओं ने दो टूक कहा कि यदि मांगें पूरी नहीं होने के कारण भविष्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल होती है और सरकारी एवं प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

 

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