हर दर्द में पेनकिलर नहीं, सही फिजियोथेरेपी से मिल सकती है राहत : डॉ. राजेश कुमार
कमर-दर्द, लकवा, नसों की समस्या से लेकर बच्चों के सेरेब्रल पाल्सी और बुजुर्गों की जोड़ों व मांसपेशियों की परेशानी तक में फिजियोथेरेपी की अहम भूमिका, बक्सर के एडवांस फिजियोथेरेपी सेंटर में आधुनिक मशीनों और नियमित व्यायाम से उपचार पर जोर

न्यूज़ विज़न। बक्सर
शरीर में होने वाले दर्द को अक्सर लोग सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या तत्काल राहत के लिए पेनकिलर का सहारा लेते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार हर दर्द का कारण एक जैसा नहीं होता और बार-बार होने वाले दर्द को केवल दवा के सहारे दबाना उचित नहीं है। दर्द शरीर का एक संकेत है, जो यह बताता है कि शरीर के किसी हिस्से में समस्या हो सकती है। ऐसे में सही कारण की पहचान और आवश्यकता के अनुसार उपचार बेहद जरूरी है।
इसी दिशा में लोगों को जागरूक करने और फिजियोथेरेपी की भूमिका को लेकर रविवार को बक्सर शहर के बाईपास रोड स्थित एडवांस फिजियोथेरेपी सेंटर के मुख्य चिकित्सा प्रभारी डॉ. राजेश कुमार ने बातचीत के दौरान फिजियोथेरेपी के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फिजियोथेरेपी का क्षेत्र काफी व्यापक है और कई ऐसी शारीरिक समस्याओं में यह उपयोगी साबित हो सकती है, जहां मरीजों को लंबे समय तक दर्द, कमजोरी, चलने-फिरने में परेशानी या शरीर के संतुलन से संबंधित दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कमर और गर्दन के दर्द से लेकर गठिया तक में उपयोगी
डॉ. राजेश कुमार के अनुसार कमर दर्द, गर्दन दर्द, गठिया, फ्रोजन शोल्डर, स्लिप डिस्क और सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस जैसी समस्याओं में उचित फिजियोथेरेपी से मरीजों को राहत मिल सकती है। नियमित एवं विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार किए जाने वाले व्यायाम शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करने और शरीर की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

लकवा और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं में भी पुनर्वास की अहम भूमिका
न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए भी फिजियोथेरेपी उपचार और पुनर्वास का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। लकवा, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, पार्किंसन डिजीज तथा नसों से संबंधित समस्याओं में मरीज की स्थिति के अनुसार फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे मरीजों में चलने-फिरने, संतुलन बनाने और दैनिक गतिविधियों को बेहतर करने के लिए नियमित अभ्यास महत्वपूर्ण माना जाता है।

चोट के बाद भी फिजियोथेरेपी से रिकवरी में मदद
खेल या अन्य कारणों से होने वाली लिगामेंट इंजरी, मांसपेशियों में खिंचाव, मेनिस्कस और रोटेटर कफ जैसी चोटों के बाद भी उचित फिजियोथेरेपी पुनर्वास में मददगार हो सकती है। वहीं घुटना या कूल्हा प्रत्यारोपण सहित अन्य ऑपरेशन के बाद शरीर की सामान्य गतिविधियों को वापस लाने के लिए भी विशेषज्ञ की निगरानी में रिहैबिलिटेशन की आवश्यकता पड़ सकती है।

बच्चों की समस्याओं में समय पर ध्यान देना जरूरी
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि बच्चों में सेरेब्रल पाल्सी, विकास में देरी तथा चलने-फिरने से संबंधित परेशानियों को लेकर अभिभावकों को विशेष रूप से जागरूक रहने की जरूरत है। यदि बच्चे के विकास या शारीरिक गतिविधियों में उम्र के अनुसार अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है, तो विशेषज्ञ से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। शुरुआती स्तर पर उचित मूल्यांकन और आवश्यक थेरेपी से बच्चे के विकास में सहायता मिल सकती है।

बुजुर्गों के लिए फिजियोथेरेपी बनी सहारा
उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों में जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी, शरीर का संतुलन बिगड़ना और चलने-फिरने में परेशानी जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं। इन समस्याओं के कारण बुजुर्गों की दैनिक गतिविधियां प्रभावित होने के साथ गिरने का जोखिम भी बढ़ सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ की सलाह से नियमित व्यायाम और फिजियोथेरेपी बुजुर्गों की शारीरिक सक्रियता बनाए रखने में मदद कर सकती है।
पेनकिलर लेने से पहले समझें दर्द का कारण
डॉ. राजेश कुमार ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि आजकल शरीर में दर्द होने पर लोग तुरंत पेनकिलर लेना शुरू कर देते हैं। इससे तत्काल राहत महसूस हो सकती है, लेकिन हर दर्द का कारण एक जैसा नहीं होता। दर्द शरीर का एक संकेत है कि कहीं कोई समस्या हो सकती है। इसलिए लगातार या बार-बार होने वाले दर्द को केवल दवा लेकर दबाने के बजाय उसके कारण को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कुछ परिस्थितियों में दवाओं की आवश्यकता होती है, कुछ समस्याओं में फिजियोथेरेपी लाभकारी हो सकती है, जबकि कई मामलों में दवा और फिजियोथेरेपी दोनों का संयोजन आवश्यक हो सकता है। इसलिए मरीजों को अपनी स्थिति के अनुसार योग्य चिकित्सक या फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही उपचार कराना चाहिए।
आधुनिक मशीनों और नियमित व्यायाम से उपचार पर जोर
बक्सर शहर के बाईपास रोड स्थित एडवांस फिजियोथेरेपी सेंटर में विभिन्न शारीरिक एवं न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के लिए नियमित व्यायाम के साथ आधुनिक मशीनों के माध्यम से उपचार और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। सेंटर में दर्द, चोट, कमजोरी, चलने-फिरने की समस्या तथा ऑपरेशन के बाद पुनर्वास जैसी जरूरतों के अनुसार उपचार पर जोर दिया जाता है। फिजियोथेरेपी को लेकर सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि दर्द को हमेशा उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और न ही हर दर्द में अपने स्तर से पेनकिलर लेना उचित है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और लंबे समय से किसी शारीरिक या न्यूरोलॉजिकल समस्या से जूझ रहे लोगों को समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। सही समय पर पहचान, उचित उपचार और नियमित व्यायाम से कई मरीजों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी को अधिक सहज और सक्रिय बनाने में मदद मिल सकती है।
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