27 वर्ष से नप को किराया देते आ रहे दुकानदारों को नहर विभाग ने बताया अतिक्रमणकारी
माडल थाना के सामने गांधी मार्केट के 17 दुकानदारों को सोन नहर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ने भेजा नोटिस


न्यूज विजन। बक्सर
नगर परिषद द्वारा करीब 25 वर्ष पूर्व मॉडल थाना के ठीक सामने बनाए गए गांधी बाजार की दुकानों को अब अवैध बताते हुए सोन नहर अवर प्रमंडल कार्यालय की ओर से खाली करने का नोटिस जारी किए जाने के बाद दुकानदारों में भारी आक्रोश है। विभाग ने सभी दुकानदारों को नोटिस थमाते हुए महज तीन दिनों के भीतर दुकानें खाली करने का फरमान सुनाया है, जिससे यहां वर्षों से व्यवसाय कर रहे परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। दुकानदारों का कहना है कि वर्ष 1999 में नगर परिषद ने विधिवत योजना बनाकर कटरा का निर्माण कराया था और दुकानों का आवंटन दुकानदारों से अग्रिम राशि लेकर किया था। उस समय इस बाजार का नाम गांधी बाजार रखा गया था और इसे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित किया गया था।
27 दिसंबर 1999 को परियोजना का शिलान्यास तत्कालीन डीएम शक्ति कुमार नेगी ने किया था। शिलान्यास के अवसर पर तत्कालीन डीडीसी हीरा लाल भी मौजूद थे। खास तो यह है कि नगर परिषद द्वारा इन दुकानों का निर्माण दुकानदारों से एडवांस के रूप में राशि लेकर किया गया था। जिले के तत्कालीन डीएम और डीडीसी द्वारा उद्घाटन की गई योजना को नहर विभाग ने अतिक्रमण बताया है। नोटिस में विभाग ने आरोप लगाया गया है कि दुकानदारों ने स्वयं कटरा बनाकर अतिक्रमण किया है, जबकि दुकानदार इस दावे को सिरे से खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि नगर परिषद के साथ विधिवत अनुबंध के तहत 17 दुकानों का निबंधन 66 वर्षों के लिए किया गया है और वे नियमित रूप से किराया भी जमा करते रहे हैं। ऐसे में अचानक उन्हें अतिक्रमणकारी घोषित करना अन्यायपूर्ण है।
दुकानदार राजेश कुमार ने कहा कि नगर परिषद से लिखित अनुबंध होने के बावजूद नहर विभाग द्वारा नोटिस जारी कर दुकान खाली कराने का प्रयास समझ से परे है। उन्होंने कहा कि जिन दुकानों को प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत बनाया गया और आवंटित किया गया, उन्हें अब अवैध बताना छोटे व्यापारियों के साथ अन्याय है। अन्य दुकानदारों में तारकेश्वर प्रसाद सिन्हा, वैद्यनाथ प्रसाद जायसवाल, शांति देवी, आफताब खां और कौसरी बेगम ने भी एक स्वर में कहा कि यदि विभागों के बीच भूमि या किराया के स्वामित्व को लेकर कोई विवाद है तो उसका समाधान आपसी स्तर पर होना चाहिए, न कि वर्षों से व्यवसाय कर रहे दुकानदारों को परेशान कर इस समस्या को और तूल देना चाहिए।
नहर विभाग के कार्यपालक अभियंता धर्मेंद्र भारती ने बताया कि उक्त दुकानें नहर विभाग की जमीन पर बनी हैं और इस संबंध में नगर परिषद को कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। विभाग का कहना है कि इसी कारण दुकानदारों को नोटिस दिया गया है। हालांकि विभाग ने फिलहाल दुकानों को तोड़ने की कार्रवाई से इनकार किया है, जिससे दुकानदारों को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है। दुकानदारों का कहना है कि गांधी बाजार सिर्फ व्यापारिक स्थल नहीं, बल्कि कई परिवारों की आजीविका का आधार है। दुकानदारों ने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी शर्त पर अपनी दुकानें खाली करने के पक्ष में नहीं हैं और जरूरत पड़ी तो आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
सोन नहर प्रमंडल ने वर्ष 2025 के जनवरी माह में भी इसी तरह का नोटिस जारी किया था। उस समय दुकानदारों ने आंदोलन की चेतावनी दी थी और विभागीय अधिकारियों से बातचीत कर अपनी समस्या रखी थी। तत्कालीन अधिकारियों के आश्वासन के बाद मामला शांत हो गया था, लेकिन अब दोबारा नोटिस मिलने से विवाद फिर से उभर आया है। दुकानदारों ने सांसद, विधायक और जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाने की बात कही है। उनका कहना है कि वे संबंधित जनप्रतिनिधियों से मिलकर पूरी स्थिति से अवगत कराएंगे और समाधान की मांग करेंगे। यदि प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन, धरना और आमरण अनशन जैसे कदम उठाने पर भी विचार किया जाएगा।
धर्मेन्द्र कुमार भारती, कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल ने कहा कि अभी हम दुकानों को तोड़ नहीं रहे हैं, लेकिन नगर परिषद को विभाग के पत्राचार का जवाब देना चाहिए। दुकानें सोन नहर विभाग के जमीन पर बनी है। नप को फिर पत्राचार किया जाएगा, पूरे मामले की जांच की जाएगी।
नगर परिषद के ईओ कुमार ऋत्विक ने कहा कि हैंड ओवर मिलने के बाद वहां नप अपनी राशि खर्च कर कटरा का निर्माण कराया है। ऐसे में राजस्व लेने का अधिकार नप को ही है। नहर विभाग उन दुकानदारों को कैसे नोटिस भेज सकता है। एकरारनामा के तहत यह संपत्ति नगर परिषद की है। पटना हाईकोर्ट में प्रोपर प्रोसेस किया जा रहा है।





