CRIME

गलत ट्रेन ने बदली दिशा, लेकिन पुलिस ने सुरक्षित लौटाए दो मासूम

मां की डांट से डरकर घर छोड़ा, कटनी बाल संरक्षण इकाई से बरामद हुए बक्सर के भाई-बहन

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
नगर थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या 15, बक्सर किला स्थित पानी टंकी के समीप रहने वाले आकाश डोम पिता संतलाल डोम के दो नाबालिग बच्चे रहस्यमय ढंग से घर से लापता हो गए थे। 14 वर्षीय पुत्री शीतल कुमारी और 6 वर्षीय पुत्र विकास कुमार 12 जनवरी को बिना बताए घर से निकल गए थे। काफी खोजबीन के बाद भी बच्चों का पता नहीं चलने पर पिता द्वारा 17 जनवरी को नगर थाना में लिखित आवेदन दिया गया। आवेदन प्राप्त होते ही नगर थाना पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 137(2) के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया। पुलिस द्वारा सीसीटीवी फुटेज का अवलोकन और तकनीकी व आसूचना संकलन के आधार पर बच्चों की तलाश तेज की गई।

 

गलत ट्रेन पकड़ने से कटनी पहुंचे बच्चे
अनुसंधान के दौरान पता चला कि दोनों बच्चे बक्सर रेलवे स्टेशन से गाजीपुर अपने ननिहाल जाने के उद्देश्य से निकले थे, लेकिन अनजाने में गलत ट्रेन पकड़ लेने के कारण मध्य प्रदेश के कटनी पहुंच गए। ट्रेन में यात्रा के दौरान एक सजग व्यक्ति ने दोनों बच्चों की स्थिति को भांपते हुए उन्हें जीआरपी कटनी के हवाले कर दिया। इसके बाद जीआरपी कटनी ने बच्चों को बाल संरक्षण इकाई, कटनी भेज दिया। हालांकि, बच्चों द्वारा पता बताने में हुई एक छोटी सी गलती ने पूरे मामले को जटिल बना दिया। बच्ची ने पूछताछ के दौरान बक्सर के स्थान पर “बस्तर” बता दिया, जिससे बाल संरक्षण इकाई को बच्चों के वास्तविक पते तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई।

 

पते की गुत्थी सुलझने पर बक्सर पुलिस से हुआ संपर्क
लगातार पूछताछ के बाद आखिरकार बच्चों ने सही पता बताया। इसके बाद कटनी बाल संरक्षण इकाई ने बक्सर पुलिस से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी। सूचना मिलते ही बक्सर पुलिस की एक टीम कटनी पहुंची और दोनों बच्चों को सुरक्षित लेकर बक्सर आई।

 

एसडीपीओ ने किया पूरे घटनाक्रम का खुलासा
रविवार को नगर थाना परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान एसडीपीओ गौरव पांडेय ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गुमशुदा किशोरी शीतल कुमारी ने अपने बयान में कहा है कि 12 जनवरी को उसकी मां ने मारपीट की थी और मरने की बात कही थी। इसी डर से वह अपने छोटे भाई को साथ लेकर घर से निकल गई। एसडीपीओ ने बताया कि पुलिस की तत्परता, तकनीकी अनुसंधान और अन्य राज्यों की पुलिस व बाल संरक्षण इकाइयों के समन्वय से दोनों बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया गया और परिजनों को सौंप दिया गया है।

 

परिजनों ने ली राहत की सांस
बच्चों की सुरक्षित वापसी के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली और बक्सर पुलिस के प्रति आभार जताया। यह मामला न सिर्फ पारिवारिक संवाद की आवश्यकता को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि समय पर की गई पुलिस कार्रवाई किस तरह बड़ी अनहोनी को टाल सकती है।

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