CRIME

पुलिस की लापरवाही से भूमि विवाद को लेकर भखवा गांव में गोलीबारी, एक की मौत चार घायल 

पीड़ित ने घटना के पूर्व तीन बार सिकरौल थाना को किया था कॉल, इसके पूर्व में भी पीड़ित परिवार के शिवशंकर चौबे की हुयी थी हत्या 

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
बक्सर जिला अंतर्गत सिकरौल थाना क्षेत्र के भखवा गांव में भूमि विवाद को लेकर हुई हिंसक घटना ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस को पूर्व में सूचना दिए जाने के बावजूद समय पर मौके पर नहीं पहुंचने से विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और देखते ही देखते गोलियों की तड़तड़ाहट से गांव में अफरा-तफरी मच गई। इस दर्दनाक घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

 

सदर अस्पताल में इलाजरत पीड़ित धनंजय चौबे द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार भखवा गांव में करीब 6 एकड़ भूमि को लेकर 1988 से विवाद चला आ रहा है। हाल ही में माननीय उच्च न्यायालय से यह विवाद पीड़ित पक्ष के हक में निपटा था। इसके बावजूद आरोपियों द्वारा जबरन धान की कटाई शुरू कर दी गई। जब पीड़ित पक्ष ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने गोलीबारी कर दी। इस घटना को अंजाम देने का आरोप बड़क चौबे, कन्हैया चौबे, विद्यासागर चौबे और गणेश चौबे पर लगाया गया है। बताया जा रहा है कि बड़क चौबे और गणेश चौबे हत्या के एक पुराने मामले में हाल ही में जेल से बाहर आए थे और रिहा होने के बाद उन्होंने फिर से इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया।

 

गोलीबारी की इस घटना में संजय चौबे पिता शिव शंकर चौबे की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं धनंजय चौबे पिता शिव शंकर चौबे, मोहन चौबे पिता भोलानाथ चौबे और अमरजीत कुमार पिता– जगनारायण चौबे गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल सदर अस्पताल बक्सर में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। पीड़ितों ने यह भी बताया कि यह भूमि विवाद नया नहीं है। इसी जमीन को लेकर वर्ष 1991 में उनके बड़े पिताजी काशीनाथ चौबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका, जिसका नतीजा आज एक और जान जाने के रूप में सामने आया।


घटना की जानकारी मिलते ही नगर थाना अध्यक्ष मनोज कुमार सदर अस्पताल पहुंचे और घायलों का बयान दर्ज किया। इस दौरान उन्होंने घायलों को ढांढस बंधाया और हर संभव कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। पुलिस की तत्परता और मानवीय पहल का परिचय देते हुए नगर थाना अध्यक्ष स्वयं अस्पताल में मौजूद रहे, जिससे पीड़ित परिवार को कुछ हद तक राहत मिली। पुलिस प्रशासन की ओर से बताया गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। वहीं गांव में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके।

इस घटना ने जहां पुलिस की प्रारंभिक लापरवाही को उजागर किया है, वहीं बाद में पुलिस अधिकारियों द्वारा घायलों की मदद, त्वरित जांच और संवेदनशील रवैये ने पुलिस का मानवीय चेहरा भी सामने लाया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पुराने भूमि विवाद का स्थायी समाधान निकाल पाता है या नहीं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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