202वीं जयंती पर गूंजा “वेदों की ओर लौटो” का संदेश
महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती पर डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, बक्सर ने निकाली भव्य शोभायात्रा सह प्रभात फेरी, वैदिक संस्कृति और नैतिक मूल्यों का दिया संदेश


न्यूज़ विज़न। बक्सर
202वीं जयंती के पावन एवं प्रेरणादायी अवसर पर डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, बक्सर के तत्वावधान में एक भव्य शोभा यात्रा सह प्रभात फेरी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में वैदिक संस्कृति, नैतिक मूल्यों तथा महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों का व्यापक प्रचार-प्रसार करना और नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ना था।
वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुआ शुभारंभ
प्रभात फेरी का शुभारंभ प्रातःकाल विद्यालय परिसर से वैदिक मंत्रोच्चारण एवं ‘ॐ’ ध्वनि के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत में महर्षि दयानंद सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर विद्यालय परिवार के प्रधान सह प्रक्षेत्र पदाधिकारी वी. आनंद कुमार, शिक्षक-शिक्षिकाएँ, शिक्षकेत्तर कर्मचारी तथा एन.सी.सी. कैडेट्स उत्साहपूर्वक उपस्थित रहे।
शहर में गूंजे वैदिक विचारों के नारे
विद्यालय से निकली शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों, मोहल्लों और रिहायशी इलाकों से होकर गुजरी। विद्यार्थियों ने “वेदों की ओर लौटो”, “सत्य, सेवा और संस्कार अपनाओ”, “नारी शिक्षा को बढ़ावा दो” और “जाति-पाँति छोड़ो, मानवता अपनाओ” जैसे प्रेरणादायी नारों से वातावरण को आध्यात्मिक और ऊर्जावान बना दिया। शोभायात्रा के दौरान वेद-पाठन, गायत्री मंत्र एवं ‘ॐ’ ध्वनि का उच्चारण लगातार किया गया। विद्यार्थियों के हाथों में महर्षि दयानंद के विचारों और आर्य समाज के 10 नियमों से युक्त तख्तियाँ, बैनर और पोस्टर थे, जिनमें समाज सुधार, शिक्षा के महत्व और वैदिक जीवन पद्धति से जुड़े संदेश अंकित थे।
प्राचार्य ने बताया नवजागरण का प्रतीक
विद्यालय के प्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती भारतीय नवजागरण के महान पुरोधा थे। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों, अंधविश्वास और सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष किया। वेदों की ओर लौटने का उनका संदेश आज भी समाज को सत्य और ज्ञान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि डी.ए.वी. संस्थान महर्षि दयानंद के आदर्शों पर आधारित है और विद्यालय का दायित्व है कि वह विद्यार्थियों को शैक्षणिक रूप से सक्षम बनाने के साथ-साथ नैतिक, सांस्कृतिक और चारित्रिक रूप से भी सशक्त बनाए।
शहरवासियों ने की सराहना
शोभायात्रा के दौरान शहरवासियों ने विद्यार्थियों के अनुशासन, उत्साह और सांस्कृतिक चेतना की सराहना की। पूरे आयोजन में आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक जागरूकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि महर्षि दयानंद सरस्वती के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाई जाएगी।





