कलश स्थापित कर घर-घर में देर रात होगी शीतला माता की पूजा


न्यूज विजन। बक्सर
चैती नवरात्र के अष्टमी की रात घर-घर विधि-विधान के साथ शीतला माता की पूजा की गई। सुबह से ही घरों की साफ-सफाई की गई। इस पूजा में स्वच्छता का पूरा ख्याल रखा जाता है। शीतला माता की पूजा और डगर बजने से पहले लोगों ने घर को गंगाजल और पानी से धोकर शुद्ध किया। घरों में शीतला माता की पूजा को लेकर एक-एक सदस्य लगे हुए थे।
शाम को चार बजते ही हाथों में कलश और आम का पल्लव लिए लोग गंगा नदी से जल लेने के लिए निकल पड़े। शहर के रामरेखा घाट, सिद्धनाथ घाट, सती घाट, नाथ बाबा घाट, जहाज घाट समेत अन्य प्रमुख गंगा घाटों पर कलश में गंगाजल भरने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग गंगा स्नान कर कलश में जल लेकर घर पहुंचे। कलश में गंगाजल लाने वालों में महिला एवं पुरूष श्रद्धालु शामिल थे।
लाला बाबा ने बताया कि सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि घर पर शीतला माता की पूजा करने से तमाम तरह की बीमारियों और कष्ट से मुक्ति मिल जाती है। उन्होंने बताया कि शीतला माता को मां दुर्गा और मां पार्वती का रूप माना जाता है। अष्टमी के दिन रतजगा कर महिलाएं शीतला माता की पूजा करती हैं। रात में चना का दाल भरी पुड़ी, गुड़ और चावल का खीर आदि का प्रसाद बनाया जाता है। शीतला मईया की पूजा-अर्चना के बाद सुबह 4 बजे के बाद उनकी विदाई श्रद्धा के साथ की जाती है।
शीतला माता की पूजा के लिए घरों में मिट्टी से बने कलश में गंगाजल भर कलश स्थापना की जाती है। इसको लेकर शहर के महात्मा गांधी बड़ा बाजार, पीपी रोड, मुनीम चौक, रामरेखा घाट रोड के फुटपाथ पर मिट्टी से बने छोटे -बड़े कलश की दुकानें सजी थी। विक्रेता मदन प्रजापति, हरि प्रजापति, संजय प्रजापति, सरल कोहार, रवि प्रजापति ने बताया कि कलश, घड़ा, दीया, ढकनी और कराह की अच्छी खासी बिक्री हो रही है। कलश, घड़ा और कराह का भाव साइज के अनुसार है।





