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मध्यप्रदेश की झांकी की कोरियोग्राफी कर रहे बक्सर के अरविंद

"पुण्य श्लोक" लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर थीम पर बनाई गई है एमपी की झांकी

न्यूज विजन। बक्सर
हर भारतीय गणतंत्र दिवस को राष्ट्रीय त्योहार के रूप में मनाते हैं। बस बार सदर प्रखंड के कुलहड़िया गांव ही नहीं पूरे जिले के लिए बेहद खास होगा। कुलहड़िया गांव निवासी रमेश चंद्र गुप्ता और दुर्गा देवी के लाल अरविंद कुमार गुप्ता 77वें गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में नया इतिहास रचने वाले हैं। बक्सर जिले के छोटे से गांव से निकले अरविंद कर्तव्य पथ पर होने वाले परेड के दौरान निकाली जाने वाली झांकी पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर मध्यप्रदेश के कलाकारों के समूह को बातौर टीम लीडर आर्टिस्ट को कोरियोग्राफ कर रहे हैं। कलाकारों की टीम के साथ वे कर्तव्य पथ पर परेड के दौरान नजर आएंगे। यह क्षण कुलहड़िया गांव के साथ ही पूरे जिले के लिए गौरव का होगा।

 

 

खास बात यह है कि एक बार फिर से अरविंद अपने मूल प्रदेश बिहार के बजाए मध्यप्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क व कला संस्कृति विभाग ने आर्टिस्ट टीम लीडर, कोरियोग्राफर के लिए इन्हें जिम्मेदारी सौंपी हैं। अरविंद ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन जनसंपर्क विभाग की ओर से तैयार हो रही झांकी में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर और महेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार किए जाने को दर्शाया गया है। जिसमें लोकमाता के इस कार्य के बाद आदिवासी समुदाय ने उत्सव मनाकर उनका आभार जताने का उल्लेख विशेष रूप से किया जाएगा। अरविंद ने बताया कि इस झांकी में उनके साथ कलाकारों का समूह आदिवासी लोकनृत्य करते हुए आगे बढ़ेगा। अरविंद के साथ कुल नौ युवा कलाकार शामिल है।

 

 

अरविंद ने बताया कि गणतंत्र दिवस परेड 2026 झांकी, नई दिल्ली ”पुण्यश्लोक” लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर मध्यप्रदेश की झांकी आत्मनिर्भरता, देशभक्ति की मूरत और सांस्कृतिक संरक्षिका लोकमाता देवी अहिल्याबाई पर केन्द्रित है। प्रथम भाग में लोकमाता देवी अहिल्याबाई की शिवलिंग हाथ में लिए चिर-परिचित प्रतिमा है। पद्म के बीच स्थापित यह प्रतिमा भारतीय मातृ शक्ति की सौम्य और गरिमामयी छवि को प्रस्तुत करती है। वहीं मध्य भाग में मां अहिल्याबाई के साथ मंत्री गण एवं सैनिक हैं। इस भाग के निचले हिस्से पर मां अहिल्याबाई के शासनकाल में होलकर साम्राज्य द्वारा किए गए मंदिर जीर्णोद्धार और निर्माण की छवि है, जहां एक सैनिक पहरा दे रहा है। झांकी के अंतिम मध्य भाग में महेश्वर का प्रसिद्ध घाट, मंदिर और किला प्रदर्शित है, जो देवी अहिल्याबाई की राजधानी, उनके प्रशासन की पहचान है। इसी भाग के नीचे नर्मदा नदी और घाट और नौका प्रदर्शित है। झांकी के अंतिम छोर पर महेश्वर घाट पर अहिल्याबाई द्वारा स्थापित मंदिर के शिखर दिखाई दे रहे हैं और नीचे भित्तिचित्रों में लोकमाता अहिल्याबाई के मार्गदर्शन में महिलाएं प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ी की निर्माण इकाई में कार्य करती दिखाई दे रही हैं, जो उनके काल में नारी सशक्तीकरण और सम्मान के साथ स्वदेशी उत्पाद का एक जीवंत प्रमाण है। झांकी के साथ ही लोक कलाकार नृत्य करते हुए नजर आएंगे।

 

अरविंद कहते हैं कि जिले के उत्कृष्ट युवा कलाकारों का सम्मान करना व रोजगार देना न केवल उनकी मेहनत की सराहना है, बल्कि यह कला, संस्कृति और समाज के विकास के लिए एक आवश्यक निवेश भी है। युवा कलाकारों का सम्मान, रोजगार कई कारणों से महत्वपूर्ण है। युवा कलाकारों के प्रति सरकार को बेहतर पहल करने की आवश्यकता है।

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