संत मैरी स्कूल में रोटरी क्लब द्वारा सीपीआर कैंप आयोजित, 150 शिक्षकों ने लिया जीवनरक्षक प्रशिक्षण


न्यूज़ विज़न। बक्सर
समाजसेवा और जनजागरूकता के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे रोटरी क्लब बक्सर द्वारा नई बाजार स्थित संत मैरी स्कूल में सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) प्रशिक्षण शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में लगभग 100 से 150 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लेकर जीवनरक्षक तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉक्टर दिलशाद आलम ने कहा कि समय पर और सही तरीके से दिए गए सीपीआर से हजारों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि हृदय गति रुकने जैसी आपात स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और यदि आसपास मौजूद लोग प्रशिक्षित हों तो किसी भी गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचने तक सुरक्षित रखा जा सकता है। रोटरी के अध्यक्ष राजीव ने कहा कि वर्तमान समय में चिकित्सक भगवान के रूप में कार्य कर रहे हैं, जो अनगिनत जिंदगियों को बचाने का काम करते हैं। उन्होंने डॉक्टर दिलशाद आलम की ईमानदार एवं समर्पित सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि अध्यक्ष पद पर रहते हुए भी वे समाजहित में निरंतर सक्रिय हैं।
मौके पर रोटरी के प्रेसिडेंट इलेक्ट निर्मल कुमार सिंह, सचिव साहिल, रोट्रैक्ट से राहुल, साबित खिदमत हॉस्पिटल से प्रमोद, मनीष सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सचिव साहिल ने अपने संबोधन में कहा कि सीपीआर जैसी तकनीक का ज्ञान आम लोगों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है, क्योंकि थोड़े से प्रयास से गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकती है। विद्यालय की शिक्षिका रश्मि मित्र ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों का मनोबल बढ़ाते हैं और आपातकालीन परिस्थितियों में आत्मविश्वास प्रदान करते हैं। उन्होंने रोटरी क्लब के इस प्रयास को अत्यंत सराहनीय बताया।
कार्यक्रम के अंत में डॉक्टर दिलशाद आलम ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए घोषणा की कि रोटरी क्लब की ओर से स्कूल को एक सीपीआर डमी प्रदान की जाएगी, ताकि भविष्य में भी नियमित रूप से प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा सकें। विद्यालय की ओर से सभी रोटरी सदस्यों का शाल एवं मोमेंटो भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में मिस फिलोमीना, राजीव रंजन, रश्मि मित्र सहित अनेक शिक्षकगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुआ, बल्कि समाज में आपातकालीन सहायता के प्रति जिम्मेदारी और सजगता का संदेश भी देता है।





