रुद्र गुरुकुल एवं स्काउट एंड गाइड के स्वयंसेवियों ने नाथ बाबा घाट पर फैले कचरे की सफाई कर दिया स्वच्छता का संदेश
वक्ताओं ने कहा -गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी जीवनरेखा, संस्कृति और सभ्यता की आधारशिला है


न्यूज विजन। बक्सर
जिला गंगा समिति के तत्वावधान में रुद्र गुरुकुल समूह एवं स्काउट एंड गाइड के युवा स्वयंसेवियों ने रविवार को स्थानीय बाबा घाट, गंगा नदी के तट पर फैले कचरे की सफाई कर गंगा स्वच्छता का सशक्त संदेश दिया। यह अभियान केवल एक सफाई कार्य नहीं था, बल्कि समाज को यह याद दिलाने का प्रयास था कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी जीवनरेखा, संस्कृति और सभ्यता की आधारशिला है।
गंगा नदी भारत की सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण नदियों में से एक है। यह करोड़ों लोगों को पेयजल, सिंचाई, आजीविका और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है। गंगा का जल न केवल मानव जीवन के लिए आवश्यक है, बल्कि यह एक विशाल जैव तंत्र को भी संजीवनी देता है। इसमें रहने वाले असंख्य जलचर जीव, पक्षी, वनस्पतियां और सूक्ष्म जीव प्रकृति के संतुलन को बनाए रखते हैं। जब गंगा प्रदूषित होती है, तो इसका सीधा प्रभाव इस पूरे जैव तंत्र पर पड़ता है, जिसका परिणाम अंततः मानव जीवन को भी भुगतना पड़ता है।
आज प्लास्टिक, घरेलू अपशिष्ट और लापरवाही के कारण नदियां प्रदूषण का शिकार हो रही हैं। गंगा भी इससे अछूती नहीं है। ऐसे में नमामि गंगे अभियान एक राष्ट्रीय संकल्प के रूप में सामने आया है, जिसका उद्देश्य गंगा की अविरलता, निर्मलता और पुनर्जीवन सुनिश्चित करना है। अभियान में जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। नाथ बाबा घाट पर रुद्र गुरुकुल समूह और स्काउट एंड गाइड के युवाओं द्वारा किया गया स्वच्छता अभियान इसी जनभागीदारी का प्रेरक उदाहरण है। युवाओं ने अपने श्रमदान से यह संदेश दिया कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे, तो गंगा को स्वच्छ और जीवंत बनाए रखना संभव है। यह कार्य आने वाली पीढ़ियों को भी प्रकृति के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार बनने की प्रेरणा देता है।
गंगा हमारी जिम्मेदारी है, क्योंकि इसका स्वच्छ रहना हमारे स्वास्थ्य, पर्यावरण और भविष्य से जुड़ा है। गंगा की रक्षा करना मतलब जीवन की रक्षा करना। आइए, हम सभी नमामि गंगे की भावना को आत्मसात करें, नदियों में कचरा न डालें, प्लास्टिक का उपयोग कम करें और स्वच्छता के लिए सामूहिक प्रयास करें। जब समाज, युवा और प्रशासन एक साथ आगे बढ़ते हैं, तभी गंगा सच अर्थों में निर्मल और अविरल बन सकती है।





