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दलसागर में रास्ते की जमीन की रजिस्ट्री पर विवाद, 50 घरों और मंदिर तक जाने वाले मार्ग पर खड़ा हुआ सवाल

ग्रामीणों में नाराजगी; प्रशासन ने बीएनएसएस की धारा 163 लगाकर दोनों पक्षों को कोर्ट में किया तलब

न्यूज़ विज़न।  बक्सर
जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत औद्योगिक थाना क्षेत्र के दलसागर गांव में रास्ते की जमीन की रजिस्ट्री को लेकर एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने अपने विभागीय प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए लगभग 50 घरों और मंदिर तक जाने वाले वर्षों पुराने रास्ते की जमीन की रजिस्ट्री करवा ली है। इस घटना के सामने आने के बाद गांव में नाराजगी और चर्चा का माहौल बना हुआ है।

 

ग्रामीणों के अनुसार जिस जमीन की रजिस्ट्री कराई गई है, वह लगभग दस फिट का निजी रास्ता है जिसे वर्षों से गांव के लोगों के आवागमन का मुख्य मार्ग रहा है। इतना ही नहीं, करीब नौ वर्ष पूर्व पंचायत द्वारा इस रास्ते पर पीसीसी ढलाई भी कराई गई थी। इसी मार्ग से गांव के लगभग 50 घरों के लोग तथा मंदिर आने-जाने वाले श्रद्धालु आवाजाही करते हैं।इस मामले में युवा जदयू के जिलाध्यक्ष मोहित कुशवाहा ने बताया कि उक्त जमीन उनके परिवार की निजी जमीन है, जिसे उनके दादा जी ने वर्षों पहले गांव के लोगों की सुविधा को देखते हुए रास्ते के रूप में दे दिया था। इसी वजह से पंचायत द्वारा भी इस रास्ते पर पीसीसी ढलाई कराई गई थी और तब से ग्रामीण इसी मार्ग का उपयोग कर रहे हैं।

 

मोहित कुशवाहा का आरोप है कि गीता देवी पति सर्वदेव चौबे ने 6 मार्च को उनके पट्टीदार जनार्दन महतो पिता मनबहाल कोइरी से लगभग एक डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री करवा ली। उनका कहना है कि जिस जमीन की रजिस्ट्री कराई गई है, उसमें वह रास्ता के साथ हमारे हिस्से की जमीन भी आता है और जिसका उपयोग वर्षों से ग्रामीण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पट्टीदार को मौखिक बंटवारे में मुख्य सड़क की ओर जमीन दी गई थी। इसके बावजूद रास्ते वाली जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई। जब उन्हें इस रजिस्ट्री की जानकारी मिली तो वे रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे और मामले की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्रार ने कर्मचारी सत्यनारायण को बुलाकर जांच रिपोर्ट के बारे में पूछा, लेकिन अब तक उन्हें किसी प्रकार की जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है।

 

मोहित कुशवाहा का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने इस रजिस्ट्री के विरूद्ध अनुमंडल पदाधिकारी को आवेदन देकर जांच की मांग की, तो क्रेता पक्ष के सर्वदेव चौबे ने भी अनुमंडल पदाधिकारी को आवेदन देकर उक्त जमीन पर बीएनएसएस की धारा 163 लगवा दी। उनका कहना है कि सामान्य तौर पर इस प्रकार की प्रक्रिया पूरी होने में एक से दो महीने का समय लग जाता है, लेकिन इस मामले में यह कार्रवाई काफी तेजी से कर दी गई। इस विवाद को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस रास्ते को बंद कर दिया गया तो लगभग 50 घरों के लोगों के साथ-साथ मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

वहीं क्रेता पक्ष के लोगों का कहना है कि यह उनके घर जाने का रास्ता है और इसे घेरने का प्रयास किया जा रहा था। इसी कारण उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री करवाई है और वे अपने रास्ते का उपयोग करेंगे।

 

इधर इस पूरे मामले को लेकर अनुमंडल पदाधिकारी अविनाश कुमार ने बताया कि औद्योगिक थाना की सूचना और संभावित विधि-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए बीएनएसएस की धारा 163 के तहत कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को नोटिस के माध्यम से कोर्ट में बुलाया गया है और प्रस्तुत कागजात के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है और ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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