सरकारी स्कूल बदहाल, निजी विद्यालयों में जाने को मजबूर! बक्सर में शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
शिक्षा पर सवाल: दो कमरे में हो रही कक्षा एक से आठवीं तक की पढाई


न्यूज़ विज़न। बक्सर
शिक्षा विभाग सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के भले ही दावे कर रहा हो, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बक्सर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। एक तरफ पूरे बिहार में निजी विद्यालयों के खिलाफ अभिभावकों का आक्रोश देखने को मिल रहा है, तो दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति लोगों को निजी स्कूलों की ओर जाने के लिए मजबूर कर रही है।
सोमवार को बक्सर शहर के स्टेशन रोड स्थित राजकीय बुनियादी विद्यालय की जो तस्वीर सामने आई, वह न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। लगभग 323 बच्चों वाले इस विद्यालय में पढ़ाई की व्यवस्था इतनी खराब है कि पूरे स्कूल को महज दो कमरों में, वह भी दो अलग-अलग शिफ्टों में संचालित किया जा रहा है। ऐसे में बच्चे कैसे पढ़ाई करते होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। अब अहम सवाल यह है उनका भविष्य कैसे संवरेगा। खास तो यह है कि बुनियादी विद्यालय के कैंपस में ही जिला शिक्षा पदाधिकारी का कार्यालय भी है। निश्चित रूप से इस विद्यालय की स्थिति चिराग तले अंधेरा की कहावत को चरितार्थ कर रही है।
राजकीय बुनियादी विद्यालय की प्रभारी एचएम ज्योत्स्ना कुमारी ने बताया कि कुल नामांकित बच्चों की संख्या 323 है। परिस्थिति वश एक ही क्लास रूम में दो से तीन कक्षाओं की पढ़ाई कराई जा रही है। बच्चों की पढ़ाई को व्यवस्थित करने के लिए दो शिफ्टों कक्षाएं संचालित की जा रही है। पहले शिफ्ट में कक्षा एक से पांच तक और दूसरे शिफ्ट में कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई हो रही है। कक्षा एक से पांच तक के बच्चों की पढ़ाई पहले शिफ्ट में सुबह 6.30 बजे से 11.30 बजे तक और दूसरे शिफ्ट में कक्षा छह से आठ की पढ़ाई 12 बजे से संध्या पांच बजे हो रही है। पहले शिफ्ट में कक्षा एक से पांच तक के छात्र-छात्राओं को अलग-अलग एक कमरे में एक साथ बैठकर पढ़ाया जा रहा है। सोमवार को पहले शिफ्ट में 70 बच्चे आज थे। ठीक इसी तरह से दूसरे शिफ्ट में कक्षा छह, सात और आठ कक्षा के कुल 83 बच्चे उपस्थित थे। तीन कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को अलग-अलग एक कमरे में बैठाकर एक साथ पढ़ाया जा रहा है। अब कल्पना कीजिए कि एक साथ तीन और चार कक्षाओं के बच्चों को एक साथ कैसे शिक्षक पढ़ाते होंगे। कहने का तात्पर्य यह है कि इन दिनों राजकीय बुनियादी विद्यालय में पढ़ाने के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है।
अभिभावकों का कहना है कि प्रशासन की इस लापरवाही और मनमानी के कारण उनके बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। कई अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि जानबूझकर सरकारी स्कूलों को बदहाल बनाया जा रहा है, ताकि निजी विद्यालयों को बढ़ावा मिल सके। एक अभिभावक ने आक्रोश जताते हुए कहा, “जब सरकारी स्कूल में पढ़ाई ही नहीं हो पाएगी, तो मजबूरी में हमें निजी स्कूल का सहारा लेना पड़ेगा, चाहे इसके लिए हमें कर्ज ही क्यों न लेना पड़े।” यह स्थिति न केवल शिक्षा के अधिकार पर प्रश्नचिन्ह लगाती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर सरकारी तंत्र किस दिशा में काम कर रहा है। जहां एक ओर सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आती है। अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो सरकारी स्कूलों पर से लोगों का भरोसा पूरी तरह खत्म हो सकता है और निजी विद्यालयों का वर्चस्व और भी मजबूत हो जाएगा।
प्रभारी हेडमास्टर ज्योत्स्ना कुमारी के अनुसार राजकीय बुनियादी विद्यालय में कुल आठ कमरा है। इसमें एक कम्प्यूटर लैब है। शेष में कक्षाएं चलती है। इधर कुछ दिनों से छह कमरे को स्ट्रांग रूम बनाकर प्रतियोगी परीक्षा का प्रश्न पत्र रखा गया है। ऐसे में विद्यालय के पास एक कमरा और एक कम्प्यूटर लैब वाला रूम बचा है। कक्षा एक से पांच तक की सभी छात्रा एक कमरे में बैठ सकें इसके लिए दरी बिछाया गया है । वहीं एक से पांच तक के छात्रों को कम्प्यूटर लैब वाले कमरे में पढ़ाया जा रहा है।





