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विश्व मानवाधिकार दिवस पर जिला जज के साथ न्यायिक पदाधिकारियों ने निकाला कैंडल मार्च

मानवाधिकार हमारे रोजमर्रा के जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं। यह नफरत, गलत सूचना और झूठ के खिलाफ आवाज उठाने की याद दिलाता है : जिला जज 

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर बुधवार को व्यवहार न्यायालय न्यायिक पदाधिकारीगण, न्यायिक कर्मचारियों व अधिवक्ताओं ने बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देशानुसार व्यवहार न्यायलय से विधिक जागरूकता रैली व कैंडल मार्च निकाली गई।

 

 

कैंडल मार्च में हर्षित सिंह, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश – सह- अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर के निर्देशानुसार व्यवहार न्यायालय, बक्सर स्थित भवन विधिक सेवा सदन से निकलकर चीनी मिल, स्टेशन रोड, के रास्ते अंबेडकर चौक तक पहुंची। मौके पर हर्षित सिंह ने कहा कि इस वर्ष विश्व मानवाधिकार दिवस 2025 की थीम “हमारी रोजमर्रा की अनिवार्यताएं” है। यह इस बात पर गौर करता है कि मानवाधिकार हमारे रोजमर्रा के जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं। यह नफरत, गलत सूचना और झूठ के खिलाफ आवाज उठाने की याद दिलाता है। संयुक्त राष्ट्र इस बात पर जोर देता है कि अब कार्रवाई करने और मानवाधिकारों के लिए वैश्विक आंदोलन को पुनर्जीवित करने का समय आ गया है। मानवाधिकार दिवस के इतिहास की बात करें तो इसकी आधिकारिक स्थापना 1950 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक प्रस्ताव द्वारा की गई थी। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 10 दिसंबर, 1948 को मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (यूडीएचआर) को अपनाने के सम्मान में इस तिथि को चुना गया था, जिसका उद्देश्य भविष्य में होने वाले अत्याचारों को रोकना और मानवीय गरिमा की रक्षा करना था। अपनी स्थापना के बाद से, मानवाधिकार दिवस हर साल मानवाधिकारों से संबंधित चल रहे संघर्षों, जैसे भेदभाव, असमानता और उत्पीड़न के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।

 

इसके साथ ही जिला प्राधिकरण बक्सर द्वारा मुक्त कारागार, बक्सर, केंद्रीय कारा मंडल बक्सर में भी इस मौके पर कारा बंदियों के बीच विधिक जागरूकता कार्यक्रम किया गया। मौके पर केंद्रीय कारा बक्सर में हुए जागरूकता कार्यक्रम में उपस्थित कारा बंदियों को संबोधित करते हुए नेहा दयाल, अवर न्यायाधीश -सह- सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर ने कहा कि मानवाधिकारों की पहली वैश्विक घोषणा और नए संयुक्त राष्ट्र की पहली प्रमुख उपलब्धियों में से एक, मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अंगीकरण और उद्घोषणा का सम्मान करने के लिए इस तिथि का चयन किया गया था। मानवाधिकार दिवस की औपचारिक स्थापना 4 दिसंबर 1950 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की 317वीं पूर्ण बैठक में हुई। जब महासभा ने संकल्प 423 (V) की घोषणा की, जिसमें सभी सदस्य राज्यों और किसी भी अन्य इच्छुक संगठनों को इस दिन को मनाने के लिए आमंत्रित किया गया था। इस दिन को आम तौर पर उच्च-स्तरीय राजनीतिक सम्मेलनों और बैठकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मानवाधिकारों के मुद्दों से संबंधित प्रदर्शनियों द्वारा चिह्नित किया जाता है। इसके अलावा, यह परंपरागत रूप से 10 दिसंबर को मानवाधिकारों के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र पुरस्कार और नोबल शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जाता है। मानवाधिकार के क्षेत्र में सक्रिय कई सरकारी और गैर-सरकारी संगठन भी इस दिन को मनाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं। जैसा कि कई नागरिक और सामाजिक कार्य कई संगठन करते हैं। इसी परिपेक्ष में हम सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कार्यकर्ताओं द्वारा आज एक कैंडल मार्च का आयोजन किया जा रहा है। जिससे की हमारे शहर के लोगो को जागरूक किया जा सके।

 

मौके पर बक्सर जिले में कार्यरत सभी न्यायाधीश, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय मनोज कुमार द्वितीय, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश मनीष कुमार शुक्ला, सुदेश कुमार श्रीवास्तव , संजीत कुमार सिंह, अपर न्यायिक दंडाधिकारी भोला सिंह एवं सभी न्यायिक पदाधिकारीगण, व्यवहार न्यायालय के प्रभारी प्रशासन, राजीव श्रीवास्तव, वरीय लिपिक संजय कुमार, नाज़िर संतोष द्विवेदी, अन्य कर्मचारी गण, सुनील कुमार चक्रवर्ती, कृष्ण कुमार, धनंजय तिवारी, अजय कुमार, संजय कुमार, कुंदेन्दु कुमार दुबे, दीपक गुप्ता, अमिताभ श्रीवास्तव सहित जिला अधिवक्ता संघ के सदस्य कार्यालय कर्मी दीपेश कुमार श्रीवास्तव, सुधीर कुमार, मनोज कुमार रवानी, सुनील कुमार, संजीव कुमार, मोहम्मद अकबर अली, स्थानीय बच्चे, पैनल अधिवक्ता अशोक कुमार पाठक, चंद्रकला वर्मा, आनंद रंजना आदि,अन्य विधि सेवक अविनाश गजेंद्र दुबे, कुमार, हरे राम, सरोज आदि मौजूद रहे।

 

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