CRIME

इलाज के नाम पर लापरवाही का सिलसिला जारी : निजी अस्पताल में भर्ती मरीज की मौत

काफी सीरियस होने के बाद बिल भुगतान के लिए किया गया देर, परिजनों ने लगाया गंभीर आरोप

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
जिले में निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान लगातार हो रही मौतों के बावजूद अब तक जिला प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। चिंताजनक बात यह है कि जिले में अधिकांश वरीय प्रशासनिक अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि महिलाएं होने के बावजूद स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

 

हाल ही में जिलाधिकारी एवं सदर विधायक आनंद मिश्रा द्वारा सदर अस्पताल की जांच के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आई थीं, लेकिन उन रिपोर्टों के बाद भी अब तक किसी अस्पताल पर ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं होना, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। इसी कड़ी में सोमवार को एक और दर्दनाक मामला सामने आया है। जिले के वरिष्ठ चिकित्सक, भाजपा नेता एवं समाजसेवी डॉ. राजेश मिश्रा से जुड़े गोलंबर जासो रोड स्थित एशिया पैसिफिक हेल्थ केयर में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत हो गई। मृतक की पहचान श्रीकृष्ण यादव (उम्र लगभग 55 वर्ष), निवासी अहिरौली के रूप में हुई है।

 

डॉक्टर की अनुपस्थिति और देर से इलाज का आरोप

परिजनों के अनुसार श्रीकृष्ण यादव खांसी, जुकाम और बुखार की शिकायत लेकर सोमवार सुबह करीब 9 बजे स्वयं रिक्शा से अस्पताल पहुंचे थे। आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था, इसके बावजूद मरीज को भर्ती कर लिया गया। परिजनों का कहना है कि दोपहर बाद काफी प्रयास के बाद डॉ. राजेश मिश्रा द्वारा मरीज को देखा गया। शाम लगभग 6:30 बजे मरीज की हालत अचानक बिगड़ने पर उसे रेफर किया गया, लेकिन आरोप है कि रेफर करने के बाद भी भुगतान को लेकर मरीज को काफी देर तक अस्पताल में बैठाए रखा गया। परिजनों का दावा है कि इस देरी के कारण मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई और एंबुलेंस में ले जाते समय ही उसकी मौत हो गई।

मौत के बाद अस्पताल में हंगामा, पुलिस मौके पर

मौत की सूचना मिलते ही परिजन एवं स्थानीय लोग अस्पताल परिसर में पहुंच गए और जमकर हंगामा किया। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। सूचना पर नगर थाना एवं मुफस्सिल थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच-पड़ताल में जुटी हुई है।

सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था

** लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद सवाल यह उठता है कि—

** क्या बिना डॉक्टर के मरीजों को भर्ती करना नियमों के खिलाफ नहीं?
** क्या रेफर करने के बाद भुगतान के नाम पर मरीज को रोका जा सकता है?
** कब तक निजी अस्पतालों की मनमानी पर प्रशासन चुप रहेगा?

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर मामले में क्या ठोस कार्रवाई करता है, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। परिजन अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजे और न्याय की मांग कर रहे हैं।

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