मौसम बदलने के साथ सरसों फसल पर लाही कीट का बढ़ा प्रकोप
केविके के कृषि विशेषज्ञ ने लाही कीट के प्रबंधन की दी जानकारी


न्यूज विजन। बक्सर
मौसम बदलने के साथ सरसों फसल पर लाही कीट का प्रकोप बढ़ने से किसान चिंतित हैं। जिले के किसान तिलहनी फसल की अच्छी खासी खेती करते हैं। इन दिनों खेतों में सरसों की फसल लहलहा रही है। मौसम में बदलाव के साथ ही सरसों फसल में लाही कीट का हमला तेज हो जाता है। इसको लेकर किसान चिंतित हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के पादप सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ रामकेवल ने बताया कि तापमान में बढ़ोतरी होने से लाही कीट का प्रकोप बढ़ने लगता है। सरसों के पौधे के बढ़ने वाले भाग कलियों, फूल तथा फलियों में स्थाई रूप से झुंडों में लाही चिपके रहते हैं। यह कीट सरसों, राइ, तोरिया के पौधे में लगे फूल एवं कलियों से रस चूस लेते हैं। इससे सरसों के उपज में 25-30 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि फली कम बनने के चलते तेल का प्रतिशत भी कम हो जाता है।
केविके के कृषि विशेषज्ञ रामकेवल ने कहा कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा, लाही कीट का भी प्रकोप बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि लाही कीट से बचने के लिए सरसों फसल की बुवाई 15 अक्टूबर से 10 नवंबर तक हर हाल में कर लेनी चाहिए, जिससे जनवरी फूल एवं फलन जनवरी माह में समाप्त हो जाए।
प्रारंभिक अवस्था में नीम का तेल 3 एमएल प्रति लीटर पानी में मिलकर छिड़काव करना चाहिए। लाही कीट का प्रकोप अधिक बढ़ने पर इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल नामक रसायन की 50 एमएल मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलकर संध्या काल में छिड़काव करना चाहिए। डॉ रामकेवल ने कहा कि सरसों के फूल पर यदि मधुमक्खियां अधिक आ रही हैं तो विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही कीटनाशी रसायन का छिड़काव करें।





