प्रभु श्रीराम ने ऋषियों के यज्ञ की रक्षा के साथ ही श्रापित अहिल्या को भी मोक्ष प्रदान किया: विजय नारायण शरण
श्री हनुमंत धाम में आयोजित श्री राम कथा में कथा व्यास ने अहिल्या उद्धार प्रसंग का किया वर्णन

न्यूज विजन। बक्सर
श्री हनुमत धाम मंदिर में आयोजित श्री सद्गुरुदेव पुण्य स्मृति महोत्सव के चौथे दिन भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। पूज्य मामा जी महाराज की स्मृति में चल रहे पांच दिवसीय महोत्सव के चौथे दिन हजारों की संख्या में पहुंचे साधु-संतों और ग्रामीण भक्तों ने श्रीराम कथा का रसपान किया।
अयोध्या से पधारे कथा व्यास पंडित विजय नारायण शरण जी ने चौथे दिन अहिल्या उद्धार प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या, जो श्रापवश शिला (पत्थर) बन गई थीं, प्रभु श्रीराम के चरण रज का स्पर्श पाते ही पुनः चेतनावस्था में आ गईं। व्यास जी ने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि “प्रभु श्रीराम करुणा के सागर हैं, उन्होंने न केवल ऋषियों के यज्ञ की रक्षा की, बल्कि श्रापित अहिल्या को भी मोक्ष प्रदान किया।
कथा व्यास ने प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण के जनकपुर नगर भ्रमण का प्रसंग सुनाया गया। उन्होंने बताया कि जब विश्वामित्र जी की आज्ञा पाकर दोनों भाई जनकपुर देखने निकले, तो उनकी अलौकिक छवि को देखकर जनकपुरवासी मुग्ध हो गए। इस प्रसंग के दौरान भजन गायकी पर श्रद्धालु झूम उठे और पूरा पंडाल ‘सिया-राम’ के जयकारों से गुंजायमान हो गया।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषता हजारों साधु-संतों की गरिमामयी उपस्थिति रही। बक्सर और आसपास के जिलों से आए महात्माओं ने पूज्य मामा जी महाराज और श्री महात्मा जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।आयोजन समिति ने बताया कि महोत्सव का अंतिम दिन है। 4 फरवरी को विशाल भण्डारा आयोजित किया जाएगा।





