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ज्ञान, विज्ञान और संस्कार का संगम : सरस्वती विद्या मंदिर में IIT रुड़की के प्रोफेसर का प्रेरक संवाद

देश–विदेश में भारत का नाम रोशन करने वाले दो विज्ञानविदों की उपस्थिति से विद्यालय में बौद्धिक चेतना का संचार

न्यूज़ विज़न। बक्सर 
सरस्वती विद्या मंदिर, सिविल लाइंस में बुधवार का दिन विज्ञान, ज्ञान और प्रेरणा के आलोक से विशेष रूप से स्मरणीय बन गया। विद्यालय परिसर उस समय विज्ञान की चेतना से जगमगा उठा, जब विज्ञान जगत की दो प्रतिष्ठित विभूतियों का सान्निध्य छात्राओं एवं आचार्यों को प्राप्त हुआ।

 

विद्यालय के सम्मानित सचिव सह महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय के रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. भरत कुमार चौबे स्वयं एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान हैं। उन्होंने अब तक कई देशों का भ्रमण कर शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उनका मार्गदर्शन विद्यालय के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहा है। इसी क्रम में उनके अनन्य मित्र, IIT रुड़की के भौतिक शास्त्र के प्रोफेसर डॉ. सचिन कुमार श्रीवास्तव का विद्यालय आगमन छात्राओं के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण एवं प्रेरणादायक रहा। डॉ. श्रीवास्तव ने रिसर्च एवं अपने विषय पर व्याख्यान देने हेतु जर्मनी, फ्रांस, इजरायल सहित कुल चौदह देशों में भारत का नाम रोशन किया है। विशेष बात यह रही कि उन्होंने जर्मनी की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर मातृभूमि की सेवा का संकल्प लिया और वर्तमान में IIT रुड़की में बतौर प्रोफेसर कार्यरत हैं।

 

अपने संबोधन में डॉ. सचिन कुमार श्रीवास्तव ने विद्यालय की बहनों का काउंसलिंग करते हुए जीवन में सफलता के मूल मंत्र साझा किए। उन्होंने कहा कि “खुद पर हौसला रखें, माता-पिता और अपने शिक्षकों पर अटूट विश्वास रखें, तभी आप जीवन में ऊंची उड़ान भर सकते हैं।” उन्होंने सरस्वती विद्या मंदिर को केवल विद्या का मंदिर नहीं बल्कि ज्ञान का सागर बताते हुए कहा कि यहां से छात्राएं जितना चाहें उतना ज्ञान अर्जित कर सकती हैं। विद्यालय का शैक्षिक वातावरण उन्हें अत्यंत प्रेरणादायक एवं प्रभावशाली लगा। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं एवं आचार्यों द्वारा विज्ञान और करियर से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे गए, जिनका उत्तर डॉ. श्रीवास्तव ने अत्यंत सहज, सरल और रोचक भाषा में देकर सभी को अभिभूत कर दिया। उनके विचारों से छात्राओं में वैज्ञानिक सोच, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण की भावना और प्रबल हुई।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य शैलेन्द्र सिंह सहित समस्त विद्यालय परिवार ने दोनों विद्वानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके आगमन को विद्यालय के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। कार्यक्रम का समापन प्रेरणा, ऊर्जा और सकारात्मक सोच के साथ हुआ, जो निश्चित ही छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की दिशा तय करने में सहायक सिद्ध होगा।

 

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