भारतीय ज्ञान परंपरा से ही होगा विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास : प्रदीप कुमार कुशवाहा
आचार्य सम्मेलन के दूसरे दिन भारतीय संस्कृति, संस्कार और मूल्यों पर दिया गया विशेष जोर


न्यूज़ विज़न। बक्सर
भारतीय ज्ञान परंपरा को सशक्त बनाने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से विद्यालयों में शिक्षण कार्य भारतीय संस्कृति, संस्कार और मूल्यों के अनुरूप किए जाने की आवश्यकता है। प्राचीन भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा जैसे गुरु–शिष्य परंपरा, नैतिक शिक्षा, जीवनोपयोगी ज्ञान एवं व्यवहारिक कौशल आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी पहले थी। उक्त बातें भारती शिक्षा समिति बिहार के प्रदेश सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा ने सरस्वती विद्या मंदिर अहिरौली में चल रहे तीन दिवसीय आचार्य सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को अपने उद्बोधन में कहीं।
आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय जरूरी
प्रदेश सचिव श्री कुशवाहा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत वेद, उपनिषद, योग, आयुर्वेद, गणित, खगोल विज्ञान, दर्शन, भाषा एवं साहित्य जैसे विषयों का आधुनिक शिक्षा पद्धति के साथ समन्वय किया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थियों का केवल बौद्धिक विकास ही नहीं होगा, बल्कि उनमें नैतिकता, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित होगी। उन्होंने विद्यालयों में संस्कृत श्लोक, नैतिक कथाओं तथा भारतीय महापुरुषों के जीवन प्रसंगों को शिक्षण प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों में आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा।
नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा की अहम भूमिका
उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में शामिल करना समय की मांग है, ताकि विद्यार्थी आधुनिक ज्ञान के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़े रह सकें। सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को उद्घाटन भारती शिक्षा समिति बिहार के प्रदेश सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके उपरांत शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन हुआ।
गीत-संगीत व विभिन्न प्रतियोगिताओं में दिखा उत्साह
सम्मेलन के दौरान गीत-संगीत, आशुवाचन, शारीरिक समता एवं सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें भोजपुर एवं बक्सर जिले के विभिन्न सरस्वती शिशु मंदिरों एवं विद्या मंदिरों के आचार्य एवं दीदी जी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सम्मेलन में विभिन्न विद्यालयों से लगभग तीन सौ से अधिक आचार्य एवं दीदी जी सहभागिता कर रहे हैं।
कार्यक्रम का संचालन और उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन गया विभाग प्रमुख उमाशंकर पोद्दार ने किया। मौके पर विभाग प्रमुख ब्रह्मदेव प्रसाद, सतीश कुमार सिंह, धरनी कांत पांडेय, लाल बाबू प्रसाद यादव, परमेश्वर कुमार, गंगा चौधरी, उप प्रधानाचार्य मनोरंजन कुमार, शैलेन्द्र कुमार, जैनेन्द्र कुमार, प्रमोद कुमार, संजीव कुमार, मनोज पांडेय समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।





