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व्यवहार न्यायालय में ई-फाइलिंग पर विशेष प्रशिक्षण, अधिवक्ताओं को डिजिटल प्रक्रिया की दी गई विस्तृत जानकारी

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश काजल झांब के मार्गदर्शन में कार्यक्रम आयोजित, मुंसिफ द्वितीय नेहा त्रिपाठी ने बताई पेपरलेस वर्किंग की आवश्यकता

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
बक्सर व्यवहार न्यायालय के पुस्तकालय भवन में अधिवक्ताओं के लिए ई-फाइलिंग संबंधी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश काजल झांब के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसमें न्यायालय की कार्यप्रणाली को डिजिटल और पेपरलेस बनाने पर विशेष बल दिया गया।

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुंसिफ द्वितीय नेहा त्रिपाठी ने कहा कि इस प्रशिक्षण सत्र का मुख्य उद्देश्य अधिवक्ताओं को न्यायिक कार्य में डिजिटल माध्यमों के उपयोग के प्रति जागरूक एवं प्रशिक्षित करना है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ न्यायिक प्रणाली में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (Information and Communication Technology) का उपयोग अत्यंत आवश्यक हो गया है। प्रशिक्षण के दौरान अधिवक्ताओं को ऑनलाइन ई-फाइलिंग की पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाई गई। उन्हें बताया गया कि किस प्रकार आवश्यक दस्तावेजों की स्कैनिंग कर पोर्टल पर अपलोड किया जाए, वाद दायर करने की ऑनलाइन प्रक्रिया क्या है, तथा मैन्युअल वर्क से ऑटोमेटिक सिस्टम में संक्रमण कैसे हो रहा है।

 

नेहा त्रिपाठी ने ई-फाइलिंग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे न्यायिक कार्य में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ेगी। साथ ही वादी स्वयं भी अपने वाद ऑनलाइन दायर कर सकेंगे, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी। कार्यक्रम का संचालन रामेश्वर प्रसाद वर्मा ने किया। इस अवसर पर संघ के अध्यक्ष बबन ओझा एवं सचिव विन्देश्वर पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे। सभी अधिवक्ताओं को ई-फाइलिंग सहित अन्य उपयोगी डिजिटल प्रक्रियाओं की भी जानकारी दी गई। इस पहल से न्यायालय की कार्यप्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

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