सिंदूर दान व सात फेरों के साथ प्रभु श्रीराम की हुयी जनक नंदिनी
जनकपुर में चारों भाइयों के विवाह के समय सखियों ने की हंसी ठिठोली के साथ गाया मंगल गीत




न्यूज़ विज़न। बक्सर
शहर के नया बाजार सीताराम विवाह महोत्सव आश्रम के महंत पूज्य श्री राजाराम शरण दास जी महाराज में पूज्य श्री खाकी बाबा सरकार के पुण्य स्मृति में चल रहे 55 वें सिय-पिय मिलन महोत्सव में सीताराम विवाह महोत्सव के आठवें दिन अगहन शुक्ल पंचमी दिन शुक्रवार की रात्री जहां हजारों हजार की संख्या में पहुंचे थे।









मंगल गीतों के बीच कभी हंसी ठिठोली का अलौकिक दृश्य देखने को मिला जहां मंगल गीतो के बीच मां सीता के मांग में भगवान श्री राम द्वारा सिंदूर भरते हीं जनक नंदिनी मां सीता भगवान श्री राम के हो गई।


हाथी पर सवार हुए राजा दशरथ व गुरू वशिष्ठ तो घोड़े पर पहुंचे दूल्हा सरकार



प्रभु श्रीराम के बारात में गुरु वशिष्ठ व राजा दशरथ हाथी पर सवार होकर तथा चारों भाई राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न घोड़ा पर सवार होकर जनकपुर के राजा जनक के द्वार पहुंचे हैं। इस दौरान बारात में शामिल श्रद्धालुगण गाते-थिरकते नजर आए महाराज जनक के द्वार पर द्वार पूजा की रस्म पूरी की जाती है। जिसके बाद दूल्हा सरकार के साथ मजाक चलता है और मंडप में धान कुटाई का रस्म की जाती है। जिसके बाद पुन: चारों भाई जनवासे में लौट जाते हैं। इस दौरान विवाह लीला की देखने के लिए दूर-दराज से कई श्रद्धालु पूरी रात इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बन स्वयं की अभिभूत महसूस कर रहे थे।

…….और कन्या परीक्षण में फंस गए चुलबुला दूल्हा लक्ष्मण जी
विवाह कन्या निरीक्षण की विधि शुरू की जाती है, जिसमें चारों भाइयों के हाथों में आम का पल्लव देती हैं और अपनी दुल्हन के ऊपर डाल कर उन्हें पहचानने को कहती हैं। जिसमें तीन भाई तो अपनी दुल्हन को पहचान लेते हैं परंतु, लक्ष्मण जी के साथ सखियां मजाक कर देती हैं और दुल्हन के जगह पुरुष को बैठा देती हैं क्योंकि, लक्ष्मण सबसे ज्यादा चुलबुले दूल्हा है और अपने को सबसे चतुर दुल्हा मानते हैं। जैसे ही दुल्हन के रुप में मौजूद जनकपुर के पुरुष सामने आता है वह लक्ष्मण से अनुरोध करता है कि वह उसे भी साथ अयोध्या ले चलने की जिद करने लगता है। बाद में लक्ष्मण को उनकी असली दुल्हन के दर्शन कराए जाते हैं।

राजा जनक व माता सुनयना ने अश्रु भरे आँखों से किया कन्यादान
कन्या परिक्षण विधि संपन्न होने के पश्चात पुनः मंडप में चारों दूल्हा सरकार को लेकर सखिया जाती है जहॉ नहछू विधि आरम्भ होता है। इस दौरान नाऊन प्रभु का नाख़ून देखते ही आश्चार्यचकित हो जाती है और कहती है की ऐसा पहले कभी नहीं देखा था। और नहछू विधि संपन्न कराया जाता है। इस विधि को संपन्न होने के बाद चारो दुल्हन मंडप में आती है और राजा जनक व माता सुनयना चारों पुत्रियों का अश्रु भरे आंखों से कन्यादान करते है। अंत में लावा मिले विधि के साथ चुमावन और कोहबर विधि की जाती है।
धान कुटाई की रश्म करते चारों दूल्हा
विवाह की सभी विधियां आश्रम के महंत राजाराम शरण दास जी महाराज के देखरेख में होता है। वही लीला के दौरान मलूक पीठाधीश्वर, राजेंद्र देवाचार्य जी महाराज, गंगापुत्र लक्ष्मी नारायण स्वामी जी महाराज, श्यामा चरण दास जी महाराज, आचार्य रणधीर ओझा के अलावा महोत्सव की व्यवस्था में राजू राय उर्फ़ झब्बू , दीपक सिंह, आश्रम के मिडिया प्रभारी राजेश सिन्हा के साथ देश के विभिन्न राज्यों से आये संत व श्रद्धालु मौजूद रहे।
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