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विश्व बंधुत्व दिवस पर आयोजित हुआ रक्तदान शिविर, दादी प्रकाशमणि जी को दी गई श्रद्धांजलि

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 

विश्व बंधुत्व दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार, 25 अगस्त को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय बक्सर एवं रेड क्रॉस सोसाइटी बक्सर के संयुक्त तत्वावधान में “ब्रह्माकुमारीज परमात्म अनुभूति भवन”, डिफेंस कॉलोनी बाबा नगर में भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि जी की पुण्य स्मृति को समर्पित था।

 

इस अवसर पर श्रद्धालुओं, समाजसेवियों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक रक्तदान कर दादी जी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की। आयोजन की विशेषता यह रही कि रक्तदान केवल सेवा भावना से नहीं, बल्कि “मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है” के संदेश के साथ किया गया। विदित हो कि 17 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने इस मेगा रक्तदान शिविर अभियान का विधिवत शुभारंभ किया था। यह अभियान विशेष रूप से ब्रह्माकुमारीज़ के समाज सेवा प्रभाग द्वारा रोटरी इंटरनेशनल, रेड क्रॉस सोसाइटी, लायंस क्लब समेत अनेक सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। अब तक इस अभियान के तहत भारत और विदेशों में 60,000 से भी अधिक यूनिट रक्त संग्रहित किया जा चुका है और आयोजन समिति का लक्ष्य है कि यह आंकड़ा 1 लाख यूनिट तक पहुँचे।

 

दादी प्रकाशमणि जी की यादें हुयी ताज़ा

शिविर के दौरान बक्सर शाखा की संचालिका ब्रह्माकुमारी रानी दीदी ने दादी जी के प्रेरणादायी जीवन को याद करते हुए कहा कि दादी जी संस्था प्रमुख होने के बावजूद केवल ईश्वरीय सेवाओं तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि हर क्षण समाज सेवा को समर्पित किया। गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता, भोजन और वस्त्र उपलब्ध कराना या किसी भी प्रकार की आवश्यकता पूरी करना उनकी जीवनशैली का हिस्सा था। उन्होंने अपना पूरा जीवन मानव कल्याण हेतु अर्पित कर दिया। आज का यह शिविर उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है। इस पुण्य कार्य में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाते हुए बक्सर रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव श्रवण तिवारी ने भी आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा समाजहित में किए जा रहे प्रयास अत्यंत अनुकरणीय हैं और इससे युवा पीढ़ी को भी प्रेरणा मिलेगी।

सेवा भाव से समाज को संदेश

रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया और एक-दूसरे को “रक्तदान – महादान” का संदेश दिया। आयोजन समिति का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल जरूरतमंदों की जान बचाने में सहायक होते हैं बल्कि समाज में भाईचारे और बंधुत्व की भावना को भी मजबूत करते हैं।

 

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