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चुरामनपुर पंचायत में आत्मा बक्सर द्वारा बासंतिक रबी कृषि जन कल्याण चौपाल 2025 का सफल आयोजन

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
बक्सर प्रखण्ड अंतर्गत चुरामनपुर पंचायत के स्थानीय पंचायत भवन में शुक्रवार को कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा), बक्सर द्वारा पंचायत स्तरीय बासंतिक रबी कृषि जन कल्याण चौपाल 2025 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि एवं कृषि विशेषज्ञ शामिल हुए।

 

चौपाल में किसानों को बासंतिक रबी सीजन के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल उत्पादन में वैज्ञानिक तरीकों और विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उप परियोजना निदेशक, आत्मा बक्सर, प्रखण्ड कृषि पदाधिकारी श्रीकृष्ण मोहन तिवारी, बीटीएम अजय कुमार सिंह, कृषि समन्वयक सभापति सिंह, एटीएम रजनीश कुमार, किसान सलाहकार राजेश कुमार, जनप्रतिनिधि भरत प्रसाद साह उपस्थित रहे।

 

 

बीज उपचार और पौधा संरक्षण पर विशेष सत्र आयोजित हुआ जिसमे विशेषज्ञों ने बताया कि बीज उपचार (Seed Treatment) फसल को रोगों से बचाता है और उत्पादन बढ़ाता है। पौधा संरक्षण के लिए समय से कीट एवं रोग प्रबंधन आवश्यक है। उन्नत बीजों के प्रयोग से उत्पादन गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार होता है। किसानों को बताया गया कि वे सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कृषि एवं उद्यान योजनाओं का लाभ उठाकर आधुनिक कृषि यंत्र, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई, सब्जी एवं फल वृक्षों की उन्नत किस्में, प्राकृतिक खेती के उपकरण प्राप्त कर सकते हैं।

पराली प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा

उप परियोजना निदेशक ने पराली (फसल अवशेष) प्रबंधन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पराली जलाना पर्यावरण और मिट्टी दोनों के लिए हानिकारक है। उन्होंने किसानों को फसल अवशेष के उपयोग के लाभ बताएं।  उन्होंने कहा कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है, लागत में कमी होती है, खेत की संरचना में सुधार होता है। उन्होंने पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध मशीनों जैसे मल्चर, रोटावेटर, स्ट्रॉ रीपर आदि के उपयोग की भी जानकारी दी। कार्यक्रम में किसानों को बताया गया कि आधुनिक कृषि यंत्रों और नई तकनीक अपनाकर वे समय की बचत, लागत में कमी, उत्पादन में वृद्धि, श्रम की कमी की पूर्ति
जैसे लाभ प्राप्त कर सकते हैं। चौपाल में किसानों ने सिंचाई, उर्वरक, बीज उपलब्धता, कीट प्रबंधन तथा सरकारी योजनाओं से संबंधित सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान किया।

 

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