आचार्य जी ने कहा -विश्वामित्र दशरथ संवाद त्याग और समर्पण का संगम है
कथा व्यास पंडित विजय नारायण शरण जी ने प्रभु श्री राम के बाल्यकाल और ऋषि विश्वामित्र के आगमन के प्रसंग की विस्तार से व्याख्या की


न्यूज विजन। बक्सर
श्री हनुमत धाम मंदिर में आयोजित श्री सद्गुरुदेव पुण्य स्मृति महोत्सव के तीसरे दिन अयोध्या से पधारे कथा व्यास पंडित विजय नारायण शरण जी ने प्रभु श्री राम के बाल्यकाल और ऋषि विश्वामित्र के आगमन के प्रसंग की विस्तार से व्याख्या की। गुरुदेव मामा जी महाराज की पावन स्मृति में चल रहे इस महोत्सव में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है।
पंडित विजय नारायण शरण जी ने विश्वामित्र-दशरथ संवाद का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब ऋषि विश्वामित्र राक्षसों के संहार और यज्ञ की रक्षा के लिए अयोध्या नरेश महाराज दशरथ से उनके ज्येष्ठ पुत्र श्री राम को मांगने आए, तो राजा दशरथ दुविधा में पड़ गए। राजा दशरथ का पुत्र-मोह और ऋषि का संकल्प, दोनों के बीच का संवाद केवल एक वार्तालाप नहीं, बल्कि जीव और ब्रह्म के मिलन की भूमिका थी। उन्होंने कहा कि “जब धर्म की रक्षा का प्रश्न हो, तो मोह का त्याग अनिवार्य है।” दशरथ जी द्वारा पुत्रों को ऋषि के साथ भेजने का निर्णय मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाला सिद्ध हुआ।
कथा के दौरान व्यास जी ने पुनः पूज्य मामा जी महाराज और श्री महात्मा जी के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार श्री राम ने गुरु की आज्ञा मानकर असुरों का नाश किया, उसी प्रकार हमें भी अपने गुरुओं के बताए मार्ग पर चलकर अपने भीतर के विकारों को नष्ट करना चाहिए। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10 बजे श्री भक्तमाल जी के सामूहिक सस्वर गायन से हुई। दोपहर में कथा के दौरान पंडाल ‘श्री राम-जय राम’ के संकीर्तन से सराबोर रहा। विदित हो कि यह महोत्सव 4 फरवरी तक चलेगा। समिति ने जानकारी दी कि 4 फरवरी को दोपहर 1 बजे से विशाल भण्डारे का आयोजन होगा, जिसमें क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद ग्रहण करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
श्री सीताराम विवाह महोत्सव आश्रम नया बाजार में अष्टादश वर्षीय श्री प्रिया प्रियतम मिलन महोत्सव पूज्य चरण श्री नारायण दास भक्तमाली जी (मामाजी: महाराज का 18 वां निर्वाण दिवस पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा श्रवण के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है।





