सदर अस्पताल में बवाल के बाद डॉक्टरों की सुरक्षा के सवाल पर गुरुवार को जिलेभर की ओपीडी ठप
चिकित्सकों व कर्मियों से दुर्व्यवहार के विरोध में भासा का आह्वान, आपातकालीन सेवा रही चालू, इलाज के लिए भटके मरीज


न्यूज़ विज़न। बक्सर
मंगलवार की देर रात बक्सर सदर अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत के बाद हुए हंगामे का असर गुरुवार को पूरे जिले में देखने को मिला। घटना के विरोध में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के आह्वान पर जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा पूरी तरह बंद रही। हालांकि इस दौरान आपातकालीन सेवाएं चालू रखी गईं, लेकिन ओपीडी बंद रहने के कारण दूर-दराज से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीजों को बिना इलाज कराए ही वापस लौटना पड़ा।
बताया जा रहा है कि मंगलवार की रात तियरा गांव निवासी राजेश सिंह की पत्नी हेवन्ती देवी की इलाज के दौरान सदर अस्पताल में मौत हो गई थी। महिला की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और बक्सर–चौसा मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। परिजनों ने चिकित्सकों और अस्पताल कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया। इस दौरान परिजन दोषियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। घटना के बाद डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए। सदर अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. नमिता सिंह ने कहा कि डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। इलाज के दौरान किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में डॉक्टर और कर्मी अक्सर मरीजों के परिजनों के गुस्से का शिकार बन जाते हैं। मंगलवार की घटना में भी डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार किया गया, जो बेहद निंदनीय है।
वहीं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. डी.एन. सिंह ने परिजनों द्वारा लगाए गए लापरवाही के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इमरजेंसी में मरीज के पहुंचते ही तुरंत इलाज शुरू किया जाता है। सदर अस्पताल की इमरजेंसी एक सामान्य इमरजेंसी है, जहां ऐसी कोई दवा या इंजेक्शन नहीं होता कि उसे देने के दस मिनट के भीतर ही मरीज की मौत हो जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लापरवाही तब मानी जाती है, जब मरीज के आने के बाद इलाज न मिले, जबकि यहां ऐसा नहीं हुआ। ओपीडी बंद रहने के दौरान अस्पताल परिसर में डॉक्टरों और कर्मियों ने एकजुट होकर अपनी सुरक्षा की मांग उठाई। इस मौके पर डॉ. सरस्वती चंद्र मिश्रा, डॉ. अमलेश कुमार, डॉ. अशोक पासवान, डॉ. विकास पांडेय, डॉ. अवनी चित्रा, डॉ. सुरुचि, डॉ. सुमित मिश्रा, डॉ. सेतु सिंह, डॉ. जय राज, अस्पताल प्रबंधक दुष्यंत कुमार सहित कर्मचारी संघ के नेता आनंद कुमार सिंह और अस्पताल के सभी कर्मी मौजूद रहे।
डॉक्टरों ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक इस तरह की घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। वहीं दूसरी ओर ओपीडी सेवा बाधित रहने से आम मरीजों में खासा आक्रोश देखा गया। अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह डॉक्टरों की सुरक्षा और मरीजों के इलाज के बीच संतुलन बनाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।





