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शशि यादव की 20 वीं बरसी पर आँखों देखी घटना : जब एक रात में जल उठा बक्सर, सड़कों पर उतरा जनसैलाब और प्रशासन हुआ बेबस!

न्यूज़ विज़न।  बक्सर
22 फरवरी 2006 — शाम लगभग साढ़े 7 बजे बक्सर शहर के पुलिस चौकी नंबर एक के समीप घटी एक घटना ने पूरे शहर को दहला दिया था। चर्चित व्यक्ति शशि यादव की हत्या की खबर जैसे ही फैली, पूरा शहर आक्रोश की आग में झुलस उठा। देखते ही देखते अस्पताल परिसर में हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। रात के अंधेरे में अस्पताल परिसर खचाखच भर गया और माहौल इतना उग्र हो गया कि अस्पताल में तोड़फोड़ शुरू हो गई। हालात बिगड़ते देख अस्पताल कर्मी अपनी जान बचाकर भाग खड़े हुए।

 

पूरी रात हल्की ठंड के बीच पुलिस चौकी पर शव के साथ परिजन और हजारों लोग धरने पर बैठे रहे। अलाव जलाकर लोग न्याय की मांग करते रहे। मीडिया कर्मियों की भारी भीड़ भी मौके पर डटी रही। घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उस समय के विधायक हृदयनारायण सिंह स्वयं पूरी रात धरने पर बैठे रहे। बताया जाता है कि शशि यादव ने उन्हें विधायक बनाने में अहम भूमिका निभाई थी, इसलिए दोनों के बीच गहरा विश्वास था।

 

सुबह होते ही फूटा जनाक्रोश
23 फरवरी की सुबह होते-होते बक्सर शहर में आक्रोश विस्फोट बनकर फूट पड़ा। कॉलेज, स्कूल, सिनेमा हॉल और सरकारी संपत्तियों पर भीड़ का गुस्सा टूट पड़ा।

 * एमवी कॉलेज के परीक्षा केंद्र पर कॉपियां फाड़ी गईं और परीक्षार्थियों ने बहिष्कार कर दिया।
 * एमपी हाई स्कूल की प्रयोगशाला में तोड़फोड़ की गई।
 * अलका सिनेमा हॉल में आग लगाने का प्रयास हुआ।
 * कृष्णा सिनेमा, दुर्गा टॉकीज और कुंवर विजय सिनेमा में चल रहे शो बीच में बंद करा दिए गए।
 * सड़कों पर अधिकारियों को दौड़ाकर पीटा गया।
 * डीएम और एसपी की गाड़ियां तक तोड़ दी गईं।

उस समय बक्सर के जिलाधिकारी रशीद अहमद खान और पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार, एडीएम राजेश कृष्ण सिन्हा और एसडीएम किशोरी साव भी पदस्थापित थे। परंतु हालात इतने बेकाबू थे कि प्रशासन पूरी तरह दबाव में आ गया। दोपहर लगभग एक बजे पटना से बिहार के एडीजी और राज्य सरकार के प्रतिनिधि बक्सर पहुंचे। आसपास के जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। अधिकारियों ने धरने पर बैठे विधायक हृदयनारायण सिंह, शशि यादव के पिता और भाई को समझाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने पर सहमति बनाई। वरिष्ठ अधिकारी तब तक बक्सर में डटे रहे, जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो गई। देर शाम चरित्रवन स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के बाद लोगों ने राहत की सांस ली।

एक ऐसी घटना जिसने बदल दी बक्सर की फिजा
शशि यादव हत्याकांड सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं थी, बल्कि वह दिन बक्सर के इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज हो गया। एक व्यक्ति की हत्या ने पूरे शहर को हिंसा और अराजकता की आग में झोंक दिया था। प्रशासनिक व्यवस्था, जनभावना और राजनीतिक समीकरण—सब कुछ इस घटना से हिल गया था।

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