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भगवान के प्रति आप प्रेम करोगे तो वो आवश्य प्रकट होंगे: गंगापुत्र

मंगलवार को विशाल भंडारा के साथ संपन्न हो जाएगा श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ

न्यूज विजन। बक्सर
सदर प्रखंड के गंगाधाम, कम्हरिया में आयोजित श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के पांचवे दिन भी कथा श्रवण के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। गंगा की गोद में बने यज्ञ मंडप का श्रद्धालुओं ने परिक्रमा कर पूजा अर्चना की। विश्व के महान मनीषी संत परम पूज्य श्री 1008 गंगापुत्र त्रिदंडी स्वामी जी महाराज ने कहा कि सिद्धाश्रम बक्सर की धरती ऋषियों-मुनियों की तपोस्थली रही है। यही वजह है कि यहां पर यज्ञ आयोजन का क्रम नहीं टूटता। उन्होंने कहा कि भगवान और संतों से प्रेम करें। गुरु और संतों की सेवा करें। सभी कष्टों से उधार हो जाएगा। उन्होंने कहा कि चरित्रवन जैसा दूसरा कोई वन नहीं जो आनंद दे। यहां महापुरूषों ने तप किया है। यही वजह है कि यहां अल्पकाल में तपस्या की सिद्धि पूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि सिद्धाश्रम बक्सर देवताओं के लिए दुर्लभ है।

 

 

गंगापुत्र त्रिदंडी स्वामी जी महाराज ने बक्सर के महात्म्य पर चर्चा करते हुए च्यवन ऋषि की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में भृगु नाम के महान ऋषि थे। उनकी पत्नी का नाम पुलोमा था। उनकी पत्नी पुलोमा गर्भवती थी। प्रमेला नाम का एक राक्षस शुकर का रूप धार कर उन्हें जबरन उनके आश्रम से उठा ले गया। पुलोमा ने राक्षस से अपने को छुड़ाने का प्रयास किया, इसी दौरान उनका गर्भ च्यवित हो गया। उस च्यवित गर्भ से तेजस्वी बालक जन्म लिया। बालक का तेज इतना था कि उसे देखते ही राक्षस प्रलोमा जलकर भस्म हो गया। आश्रम में लौटकर माता-पिता ने बालक का नाम च्यवन रखा। आगे चलकर वह बालक अपने कर्त्तव्य कृति से महर्षि च्यवन ऋषि के नाम से प्रसिद्ध हुए। धर्म शास्त्रों के अनुसार उनका आश्रम चौसा में है और चौसा सिद्धाश्रम में।

 

 

कथा वाचक गंगापुत्र ने कहा कि हमारे और आपके दृष्टि में भेद हो सकता है। लेकिन, संतों की दृष्टि में सभी एक समान होते हैं। भगवान सबके अंदर हैं। भगवान के प्रति आप प्रेम करोगे तो वो आवश्य प्रकट होंगे। भगवान कहते हैं कि पूर्ण रूपेण हमारे हो जाओ। अपने को ही ले लिजिए। आज जिससे प्रेम करते हैं, तो यह भी चाहते हैं कि वो दूसरे से प्रेम नहीं करे। भगवान पर विश्वास करें। ऐसा करने से आने वाला खतरा टल जाएगा। उन्होंने सिद्धाश्रम के पंचकोशी यात्रा पर चर्चा करते हुए कहा कि सभी को कम से कम एक बार यह यात्रा विधि-विधान से करना चाहिए। कथा विराम के बाद श्रद्धालुओं ने महाराज की के साथ मां गंगा की पूजा और आरती की।

 

 

मंगलवार को गंगाधाम, कम्हरिया में संचालित श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ की पूर्णाहुति भव्य भंडारा के साथ होगी। महायज्ञ में आने वाले सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भंडारा में काफी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे। गंगाधाम, कम्हरिया में आयोजित महायज्ञ में सवा लाख हनुमान चालीसा का पाठ किया जारहा है। वहीं अखंड हरिकीर्तन का आयोजन किया गया है।

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