आर्म्स एक्ट के पुराने मामले में ब्रह्मर्षि समाज के अध्यक्ष राकेश राय उर्फ कल्लू राय साक्ष्य के अभाव में बरी
पंचायत चुनाव 2016 के दौरान दर्ज हुआ था मामला, बरामदगी व जब्ती प्रक्रिया में तकनीकी खामियां पाईं गईं, कोर्ट नं.-4 के न्यायाधीश चंदन कुमार की अदालत ने दिया संदेह का लाभ


न्यूज़ विज़न। बक्सर
आर्म्स एक्ट से जुड़े एक पुराने मामले में शहर के चर्चित व्यक्ति एवं ब्रह्मर्षि समाज के बक्सर जिलाध्यक्ष राकेश राय उर्फ कल्लू राय को अदालत से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट नं.-4 के न्यायाधीश चंदन कुमार की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी को बरी करने का आदेश दिया। यह फैसला लंबी सुनवाई और सभी तथ्यों के गहन परीक्षण के बाद सुनाया गया।
मामला वर्ष 2016 का बताया जाता है, जब पंचायत चुनाव के दौरान राकेश राय उर्फ कल्लू राय के विरुद्ध आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया था कि आरोपी के पास से अवैध हथियार बरामद किया गया था और इसी आधार पर पुलिस द्वारा मामला दर्ज किया गया था। मामले की जांच और सुनवाई के दौरान अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों के बयानों की बारीकी से जांच की गई। सुनवाई के क्रम में यह तथ्य सामने आया कि हथियार की कथित बरामदगी और जब्ती की प्रक्रिया में कई तकनीकी त्रुटियां थीं। साथ ही, अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए गवाहों के बयान भी आपसी विरोधाभास से ग्रसित पाए गए, जिससे आरोप की पुष्टि नहीं हो सकी।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने में असफल रहा है। न्यायालय ने यह भी माना कि मामले में प्रस्तुत साक्ष्य इतने मजबूत नहीं हैं कि आरोपी को दोषी ठहराया जा सके। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए न्यायाधीश चंदन कुमार ने राकेश राय उर्फ कल्लू राय को संदेह का लाभ देते हुए आर्म्स एक्ट के मामले में बरी करने का आदेश दिया।
मामले में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता धीरज कुमार ने प्रभावी ढंग से पैरवी की। अदालत के फैसले के बाद बचाव पक्ष ने न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि न्यायालय ने तथ्यों और कानून के आधार पर निष्पक्ष निर्णय दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी और उनके समर्थकों में संतोष का माहौल देखा गया, वहीं यह निर्णय कानून व्यवस्था में निष्पक्ष न्याय की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।





