ट्यूनिंग प्रोग्राम के तहत दो विद्यालयों का शैक्षणिक भ्रमण, एमपी हाई स्कूल में दिखा आदर्श आतिथ्य


न्यूज़ विज़न। बक्सर
शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा देने और विद्यालयों के बीच आपसी सीख को सशक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ट्यूनिंग प्रोग्राम के तहत मंगलवार को नेहरू स्मारक उच्च विद्यालय, बक्सर के छात्र-छात्राओं ने एमपी उच्च विद्यालय, बक्सर का शैक्षणिक भ्रमण किया। यह भ्रमण न केवल विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गया। एमपी उच्च विद्यालय पहुंचने पर विद्यालय परिसर को दुल्हन की तरह सजाया गया था। जैसे ही नेहरू स्मारक उच्च विद्यालय के छात्र-छात्राओं का आगमन हुआ, एमपी उच्च विद्यालय के विद्यार्थियों ने पुष्प वर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया, जिससे पूरा वातावरण उत्साह और अपनत्व से भर उठा।
इस अवसर पर एमपी उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार ने नेहरू स्मारक उच्च विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राओं का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भ्रमण के दौरान नेहरू स्मारक उच्च विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने एमपी उच्च विद्यालय की कक्षा-कक्ष व्यवस्था, विशाल खेल मैदान, सुंदर उद्यान सहित शैक्षणिक वातावरण का अवलोकन किया। विद्यालय की अटल टिंकरिंग लैब विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जहां आधुनिक तकनीक और नवाचार से जुड़े प्रयोगों को देखकर छात्र-छात्राएं बेहद प्रफुल्लित और उत्साहित नजर आए।
प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार द्वारा नेहरू स्मारक उच्च विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक को बुके भेंट कर सम्मानित किया गया, जो दोनों संस्थानों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों का प्रतीक बना। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के सभी शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं के लिए जलपान की समुचित व्यवस्था की गई थी, जिससे आयोजन और भी सुव्यवस्थित एवं यादगार बन गया। इस मौके पर विद्यालय के शिक्षकगण अजय कुमार, पुरुषोत्तम पांडे, अशोक कुमार, विनोद कुमार चौबे, रूबी कुमारी, रोशनी कुमारी, अन्नू सिंह, अनिता कुमारी, गीता कुमारी, मधु सिंह, बैकुंठ कुमार सिंह, शैल कुमारी, संगीता तिवारी, प्रियंका चौबे, स्मिता कुमारी सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।
यह शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम यह संदेश देता है कि यदि विद्यालय आपसी सहयोग, नवाचार और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें, तो शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं प्रेरक बनाया जा सकता है। निश्चित रूप से यह आयोजन अन्य विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल साबित होगा।





