अग्नि के सात फेरा लेकर प्रभु श्री राम की हुईं जनक दुलारी
श्री राम विवाह व कलेवा के रस्म के साथ संपन्न हुआ सिय पिय मिलन महोत्सव


न्यूज विजन। बक्सर
शहर के नया बाजार सीताराम विवाह महोत्सव आश्रम के महंत पूज्य श्री राजाराम शरण दास जी महाराज में पूज्य श्री खाकी बाबा सरकार के पुण्य स्मृति में चल रहे 56 वें सिय-पिय मिलन महोत्सव में अगहन शुक्ल पंचमी के दिन प्रभु श्रीराम अाैर जनक नंदनी का विवाह संपन्न हुअा। इस पावन अवसर का हजारों साधु-संत अाैर हजाराें श्रद्धालु साक्षी बने। प्रभु श्रीराम अाैर माता जानकी के विवाह उत्सव में शामिल हाेने के लिए संध्या सात बजे से ही अाश्रम में महिला एवं पुरूष श्रद्धालुअाें की भीड़ जुटनी शुरू हाे गई थी। लाेग नये परिधानाें में सज-धजकर विवाह उत्सव में शामिल हाेने के लिए पहुंचे हुए थे। श्री सीताराम विवाह महाेत्सव आश्रम एवं विवाह मंडप की अद्भुत सजावट की गई थी।
श्री सीताराम विवाह महाेत्सव अाश्रम में प्रभु श्रीराम अाैर जानकी माता विवाह के बने माहाैल से मिथिला का अहसास हाे रहा था। महाराजा दशरथ और वशिष्ठ मुनि हाथी पर सवार हाेकर पहुंचे। वहीं प्रभु श्रीराम, अनुज लक्ष्मण जी, भरत जी और शत्रुघ्न जी चाराें दूल्हा सरकार घाेड़ा पर सवार कर पहुंचे। चाराें दूल्हा सरकार का आभामंडल देख साधु-संत और श्रद्धालु मुग्ध हाे गये। द्वार पूजा रस्म का दृश्य देख लाेग हर्षित हाे गये। महिलाएं पारंपरिक विवाह के गीताें पर महिलाएं थिरक रहीं थी। महिलाएं माथे पर कलश रख दूल्हा सरकार की स्वागत में खड़ी थी। महराजा जनक के द्वार पर विधि-विधान के साथ द्वारपूजा की रस्म पूरी की गई। इस दाैरान दूल्हा सरकार के साथ महिलाओं ने जमकर हंसी-मजाक करती दिखी। द्वारपूजा रस्म पूरा हाेने के बाद मंडप में धान कुटाइर् की रस्म हुई, इसके बाद चाराें दूल्हा सरकार जनमासा में लाैट जाते हैं। इस अलाैकिक द्श्य काे देखा लाेग खुद काे धन्य महसूस कर रहे थे।
विवाह कन्या निरीक्षण की विधि शुरू हुई, जिसमें सखियां चारों भाइयों के हाथों में आम का पल्लव देती हैं और अपनी दुल्हन के ऊपर डाल कर उन्हें पहचानने को कहती हैं। जिसमें तीन भाई तो अपनी दुल्हन को पहचान लेते हैं, परंतु लक्ष्मण जी के साथ सखियां मजाक कर देती हैं और दुल्हन के जगह पुरुष को बैठा देती हैं। लक्ष्मण सबसे ज्यादा नटखट दूल्हा हैं और अपने को सबसे चतुर दुल्हा मानते हैं। जैसे ही दुल्हन के रुप में मौजूद जनकपुर के पुरुष सामने आता है वह लक्ष्मण से अनुरोध करता है कि वह उसे भी साथ अयोध्या ले चलंे। वह इसके लिए जिद करने लगता है। बाद में लक्ष्मण को उनकी असली दुल्हन के दर्शन कराए जाते हैं। मंगल गीतों के बीच कभी हंसी ठिठोली का अलौकिक दृश्य देखने को मिला। मंगल गीतों के बीच माता सीता के मांग में भगवान श्री राम द्वारा सिंदूर भरते ही जनक नंदिनी मां सीता भगवान श्री राम की हो गई।
कन्या परीक्षण विधि संपन्न होने के पश्चात पुनः मंडप में चारों दूल्हा सरकार को लेकर सखियां जाती हैं, जहां नहछू विधि आरम्भ होता है। इस दौरान नाऊन प्रभु का नाखून देखते ही आश्चर्यचकित हो जाती है और कहती हैं कि ऐसा पहले कभी नहीं देखा था। और नहछू विधि संपन्न कराया जाता है। इस विधि को संपन्न होने के बाद चारों दुल्हन मंडप में आती है और राजा जनक व माता सुनयना चारों पुत्रियों का अश्रु भरे आंखों से कन्यादान करते है। अंत में लावा मिलाने वाली विधि के साथ चुमावन और कोहबर विधि की गई। विवाह की सभी विधियां आश्रम के महंत राजाराम शरण दास जी महाराज के देखरेख में सम्पन्न हुअा। वहीं लीला के दौरान मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र देवाचार्य जी महाराज समेत अन्य साधु-संत और श्रद्धालु मौजूद थे।
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