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“भारतीय इतिहास को ग्रामीण नज़रियें से देखने की ज़रूरत हैं “

क्रिएटिव हिस्ट्री के 13वें वार्षिक सम्मलेन में हुआ 'इतिहास समाचार' का लोकार्पण

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
पिछले कुछ दशकों में भारतीय इतिहास पर विचार करने का नज़रिया बदला हैं। परम्परिक और आधुनिक इतिहास लेखन की पद्धतियों में बदलाव आया है तथा इतिहास अभिलेखगारों और बड़े-बड़े सेमिनार हॉलों से बाहर निकलकर जनता की स्मृति और गाँव के जन स्थानों तक पहुँचा हैं। इस इतिहास दृष्टि में सबसे बड़ा परिवर्तन यह हुआ हैं कि अब प्रोफेशनल इतिहासकार और ग्रामीण बुद्धिजीवी एकसाथ बैठकर इतिहास लेखन की प्रक्रियाओं से टकरा रहें हैं।” ये बातें क्रिएटिव हिस्ट्री ट्रस्ट, दिल्ली द्वारा महावीर सिंह स्मारक ट्रस्ट, बिशनपुर; रंगश्री, परम्परा/जेएनयू स्कॉलर ग्रुप और बक्सर स्कूल ऑफ़ हिस्ट्री द्वारा  मेरा गाँव, मेरा इतिहास विषयक 13वें क्रिएटिव हिस्ट्री वार्षिक सम्मलेन 2025 में उभरकर आयी। कार्यक्रम में शामिल इतिहासकारों और ग्रामीण बुद्धिजीवियों में तपेश्वर सिंह, गंगाधर कुंवर, रश्मि चौधरी,  बिनोद कुमार सिंह, हितेन्द्र पटेल, देवेंद्र चौबे, गिरीशचंद्र पाण्डेय और सत्येंद्र कुमार सिंह का मानना था कि “इतिहास लेखन में ग्रामीण बुद्धिजीवियों के शामिल होने से इतिहास लेखन पर मुख्यधारा के इतिहासकारों का वर्चस्व टूटा हैं तथा इतिहास लेखन में क़ृषि संस्कृति, ग्रामीण सभ्यतायें, आम जन का प्रतिरोध, दर्शन तथा स्वाधीनता आंदोलन से जुड़े ऐसे संकेत इतिहास लेखन का हिस्सा बनेंगे जिन्हें अमहत्वपूर्ण मानकर मुख्यधारा के इतिहासकार कई बार छोड़ देते हैं।

 

 

स्वतंत्रता सेनानी महावीर सिंह के गाँव बिशनपुर में क्रिएटिव हिस्ट्री द्वारा आयोजित इस वार्षिक सम्मलेन में क्रिएटिव हिस्ट्री के मुख पत्र इतिहास समाचार के अक्टूबर 2025 अंक के लोकार्पण के साथ ही इतिहासकारा हितेन्द्र पटेल और गिरीशचंद्र पाण्डेय की साहित्य एवं इतिहास पर केंद्रित पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर सामाजिक चिंतक बिनोद कुमार सिंह ने 20वां कुंवर सिंह स्मृति व्याख्यान, जे पी आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्त्ता तपेश्वर सिंह ने 13वां रामायण चौबे स्मृति लोक व्याख्यान और गंगाधर कुंवर 5वां कुमार नायन स्मृति ग्रामीण इतिहास व्याख्यान दिया। इतिहासकार हितेन्द्र पटेल, रश्मि चौधरी, प्रसिद्ध लेखक और जे एन यू में प्रोफ़ेसर देवेंद्र चौबे और सामाजिक चिंतक सत्येंद्र कुमार सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की तथा ग्रामीण बुद्धिजीवी विजय कुमार, प्रशांत कुमार सिंह, बिनोद कुमार, उज्जवल आलोक और शंकर कुमार ने ‘मेरा गाँव, मेरा इतिहास’ पर अपने विचार रखें। कार्यक्रम का संचालन किया कवि आंनद मोहन झा ने और धन्यवाद ज्ञापन दिया युवा अध्येता चन्दन कुमार सिंह ने।

 

 

तीन ग्रामीण विद्यार्थी हुए पुरस्कृत

क्रिएटिव हिस्ट्री के इस परिसंवाद में सरकारी स्कूल के सातवीं कक्षा में अधिकतम अंक प्राप्त करने के लिए अंजलि कुमारी, दिनेश पंडित और शशि कुमारी को क्रमशः फातिमा यास्मीन, एन. के. चौधरी और मोनाको देवी स्मृति वार्षिक छात्रवृत्ति के साथ ही सम्मान पत्र से पुरस्कृत किया गया।

गिरमिटियलोजी पर आधारित संस्थान द्वारा दिया गया अंतरराष्ट्रीय गिरमिटिया सम्मान

उदघाटन सत्र में महावीर सिंह मेमोरियल ट्रस्ट और अंतरराष्ट्रीय गिरमिटिया संस्थान (GGLASC) द्वारा प्रसिद्ध लेखक और जेएनयू में प्रोफ़ेसर देवेंद्र चौबे एवं इतिहासकार डॉ. रश्मि चौधरी को प्रथम अंतरराष्ट्रीय गिरमिटिया सम्मान से सम्मानित किया गया। इस सम्मान की स्थापना प्रसिद्ध विद्वान और सूरीनाम के आप्रवासी भारतीय और वर्तमान में नीदरलैंड के निवासी प्रो. श्रद्धानंद हरिनन्दनसिंह द्वारा फरवरी 2025 में महावीर सिंह स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित किया गया था।  कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति ने ग्रामीण इतिहास पर केंद्रित इस कार्यक्रम को एक बड़ा फलक प्रदान किया।

 

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