खतरे निशान से महज 25 सेंटीमीटर दूर है गंगा का जलस्तर, जिले में फिर एक बार मंडराया बाढ़ का खतरा




न्यूज़ विज़न। बक्सर
जिले पर एक बार फिर बाढ़ का संकट गहराने लगा है। उत्तराखंड और झारखंड सहित पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं का सीधा असर अब गंगा नदी के जलस्तर पर दिखने लगा है। पिछले दो दिनों से गंगा का पानी लगातार बढ़ रहा है, जिससे प्रशासन और स्थानीय लोग अलर्ट हो गए हैं।









केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, बुधवार सुबह 8 बजे गंगा का जलस्तर 59.89 मीटर दर्ज किया गया था, जबकि शाम 5 बजे तक यह बढ़कर 60.07 मीटर तक पहुंच गया। यानी दिनभर में लगभग 18 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई। यह जलस्तर चेतावनी निशान (59.32 मीटर) से 75 सेंटीमीटर ऊपर और खतरे के निशान (60.32 मीटर) से महज 25 सेंटीमीटर नीचे है। जानकारों का कहना है कि अगर जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो गंगा जल्द ही डेंजर लेवल को पार कर जाएगी। गंगा का पानी दियारा क्षेत्र और निचले इलाकों में तेजी से फैलने लगा है। बक्सर शहर के रामरेखा घाट से लेकर सारिमपुर तक निचले हिस्से पानी में डूबने लगे हैं। रामरेखा घाट की सभी सीढ़ियां जलमग्न हो चुकी हैं। इतना ही नहीं, शहर के नया और पुराना विवाह मंडप में भी बाढ़ का पानी फिर से घुस गया है। गंगा तटवर्ती गांवों के लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं। ग्रामीण परिवार अपने मवेशी और जरूरी सामानों के साथ ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं।





ठोरा नदी का जलस्तर भी बढ़ा
गंगा में बढ़ते दबाव का असर सहायक नदियों पर भी पड़ रहा है। ठोरा नदी का जलस्तर बढ़ने से छोटका नुआंव पंचायत के कई गांवों कोड़रवा, लरई, गोविंदपुर, पुलिया, मिल्कियां और हरिपुर में पानी फैलने लगा है।
कृतपुरा-गोविंदपुर मार्ग पर भी ठोरा नदी का पानी चढ़ने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। हर साल आने वाली बाढ़ से हुए भारी नुकसान को देखते हुए लोग पहले से ही सजग हो गए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोग घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर पहुंचने की तैयारी में जुट गए हैं। प्रशासन की ओर से भी हालात पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। जिला प्रशासन ने बक्सर, चौसा, सिमरी, चक्की और ब्रह्मपुर प्रखंड के निचले हिस्सों को विशेष रूप से संवेदनशील घोषित किया है। इन क्षेत्रों में बाढ़ का सबसे अधिक असर पड़ता है और फसल, घर-मकान तथा पशुधन को भारी क्षति होती है।
हर साल दोहराता है दर्द
गंगा के तटीय इलाके में रहने वाले लोगों के लिए बाढ़ कोई नई बात नहीं है। हर साल यह त्रासदी यहां के लोगों की जिंदगी को अस्त-व्यस्त कर देती है। कई बार तो हालात इतने खराब हो जाते हैं कि लोग महीनों तक ऊंचे बांधों और स्कूलों में शरण लेने को मजबूर हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए, ताकि हर साल होने वाली तबाही से लोगों को निजात मिल सके।

