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चारों दूल्हा सरकार के दिव्य दर्शन कर निहाल हुए शहरवासी

श्री सीताराम विवाह आश्रम से निकाली गई श्री राम बारात की दिव्य शोभा यात्रा

न्यूज विजन। बक्सर
प्रभु श्रीराम के बारात में शामिल होने के लिए नया बाजार स्थित श्री सीताराम विवाह महोत्सव आश्रम में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। देखते ही देखते पूरा पंडाल साधु-संतों और श्रद्धालुओं से पट गया। मंच से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ही मंगल गीत गाये जा रहे थे। मंगल गीताें पर श्रद्धालु झूम रहे थे। वहीं मंच पर देश के कोने-कोने से आए साधु-संत विराजमान थे।

 

वहीं दूसरी ओर प्रभु श्रीराम बरात निकलने की तैयारी भी आश्रम में चल रही थी। महर्षि खाकी बाबा सरकार के 55वां निर्वाण दिवस पर आयोजित होने वाले राम विवाह के सभी रस्मों को देखने के लिए आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा हो। आश्रम का परिसर राममय हो गया था। श्री सीताराम विवाह महोत्सव आश्रम परिसर में मटकोर रस्म शुरू हुई। कहवां के पियर मटिया-सोनवा के कुदाल हे, मिथिला के सात सुहागिन माटी कोड़े आई हे…, गावत बजावत सखी सब हर्षाई हे-कमला के सुंदर तट माटी कोड़े आई हे… मंगल गीत पर सखियों ने नृत्य करते हुए विधि विधान के साथ माटीकोर रस्म की अदायगी की। माटीकोर रस्म पूरा होने के बाद सातों सखियों ने आंचल में मिट्टी लेकर विवाह मंडप में स्थापित की। इस दौरान प्रभु श्रीराम व माता जानकी के जयघोष से आश्रम गूंज उठा।

 

मटकोर विधि संपन्न होने के बाद जनक दुलारी सिया जी को हल्दी चढ़ाने की रस्म शुरू हुई। सिया जी को बारी-बारी से साधु-संत, भैया, सखियों, मईया आदि ने हल्दी लगाया। सखियां अगे माई हरदी हरदिया दूब पातर ना, सखी हे हल्दी चढ़ाऊं सुकुमारी सिया के… मंगल गीतों से पंडाल गूंज रहा था। एक तरफ हल्दी का रस्म अदा हो रही थी तो दूसरी ओर सखियां ठुमक-ठुमक कर ठिठोली कर रही थी। विधि-विधान के साथ प्रभु श्री राम सहित चारों दुल्हा सरकार का हल्दी और मटकोर विधि किया गया।

श्री सीताराम विवाह महोत्सव आश्रम से निकाली गई श्रीराम बारात शोभा यात्रा में अलौकिक नजारा दिखा। आज मिथिला नगरिया निहाल सखियां, चारों दूल्हा में बड़का कमाल सखियां गीत के धुन पर बरातियों ने जमकर ठुमका लगाए। प्रभु के बारात में देवो के देव महादेव और माता पार्वती बसहा बैल पर सवार होकर बराती बने हुए थे। वहीं गणेश भगवान मूसक पर सवार थे।

इस तरह से बारात में शामिल अन्य देवी-देवताओं और ऋषि मुनियों से धरा पर देवलोक का दृश्य प्रतीत हो रहा था। बारात आश्रम परिसर से निकलकर पूज्य संत खाकी बाबा जी के समाधि स्थल महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय पहुंची जहां बरातियों का भव्य स्वागत किया गया। यहां मंगल गीत और पारंपरिक गाली सुन बराती निहाल हो गये। इसके बाद पूरे नगर का भ्रमण करते हुए बारात पांडेपट्टी स्थित ठाकुरबाड़ी पर पहुंची। वहां बरातियों का आदर सत्कार कर विवाह स्थल रवाना किया गया।

सिय-पिय मिलन महोत्सव के जनक पूज्य संत श्रीनारायणदासजी भक्तमाली मामाजी व उनके गुरू खाकी बाबा के तैल चित्रों की झांकी बारात संग चल रही थी। नगरवासी प्रभु श्रीराम बारात के दर्शन को राह देख रहे थे। श्री राम बारात शोभा यात्रा जिस रास्ते से गुजरी वहां भगवान श्रीराम की आरती उतारने के साथ-साथ लोगों ने बरातियों पर पुष्प वर्षा की। रथ पर सवार चारों दूल्हा सरकार के पहुंचते ही लोग जय श्रीराम का जयघोष करने लगते थे। स्थानीय लोगों द्वारा जगह-जगह पानी और शर्बत की व्यवस्था बरातियों के लिए की थी। नगर के नर-नारी और बच्चे भगवान श्रीराम समेत दशरथ नंदन चारों राजकुमार के दर्शन पाने के लिए ललायित दिखे।

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