स्व. घनश्याम मिश्र की 20वीं पुण्यतिथि पर स्मृति, सम्मान और संकल्प की श्रद्धांजलि सभा आयोजित
न्याय, विचार और साहित्य की अविरल धारा को शत-शत नमन


न्यूज़ विज़न। बक्सर
जिला अधिवक्ता संघ, बक्सर के तत्वावधान में मंगवार 6 जनवरी को न्याय, विधि और साहित्य के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता, शिक्षाविद एवं अप्रतिम साहित्यसेवी स्व. घनश्याम मिश्र की 20वीं पुण्यतिथि के अवसर पर एक गरिमामय, भावपूर्ण एवं स्मरणीय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन जिला बार संघ के पुस्तकालय भवन में किया गया। यह सभा न केवल एक पुण्यतिथि का आयोजन थी, बल्कि एक ऐसे युगद्रष्टा व्यक्तित्व के विचारों और कृतित्व को नमन करने का अवसर भी बनी, जिनका संपूर्ण जीवन न्याय, ज्ञान और लोकभाषा की सेवा को समर्पित रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिय अधिवक्ता सह अध्यक्ष अधिवक्ता संघ बक्सर बबन ओझा ने किया, जबकि मंच का संचालन अधिवक्ता रामेश्वर प्रसाद वर्मा जी के द्वारा किया गया। संचालनकर्ता ने अपने संयत, ओजस्वी एवं साहित्यिक शब्दों से पूरे कार्यक्रम को एक भावनात्मक गरिमा प्रदान की। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि स्व. घनश्याम मिश्र जी केवल एक सफल अधिवक्ता ही नहीं थे, बल्कि वे न्यायिक चेतना के संवाहक, विधि शिक्षा के मार्गदर्शक और भोजपुरी साहित्य के सशक्त स्तंभ थे। उन्होंने आजीवन सत्य, न्याय और नैतिक मूल्यों के पक्ष में खड़े रहकर समाज को दिशा देने का कार्य किया। जननायक कर्पूरी ठाकुर लॉ कॉलेज में अध्यापन कार्य के माध्यम से उन्होंने विधि के असंख्य विद्यार्थियों को न केवल कानून का ज्ञान दिया, बल्कि न्यायप्रियता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी रोपी।
साहित्य के क्षेत्र में स्व. मिश्र जी का योगदान भोजपुरी भाषा और संस्कृति के लिए एक अनुपम धरोहर के समान है। उन्होंने शास्त्रीय, धार्मिक और विधिक ग्रंथों को जन भाषा में अनूदित कर उन्हें आम जनमानस तक पहुँचाने का ऐतिहासिक कार्य किया। “गीता” तथा “अमरावती कथा संग्रह” का भोजपुरी अनुवाद उनकी गहन वैचारिक समझ और भाषिक सामर्थ्य का प्रमाण है। विशेष रूप से “चानी के झूझना” नामक उनके अनूदित अंश को एम.ए. पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना, उनकी साहित्यिक साधना की अकादमिक स्वीकृति को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त उनके द्वारा किए गए “चकबंदी विधान”, “तुलसीकृत पार्वती मंगल” एवं “जानकी मंगल” के भोजपुरी अनुवाद न केवल विधि और साहित्य का सेतु हैं, बल्कि लोकभाषा में गंभीर विषयों को प्रस्तुत करने की उनकी अद्भुत क्षमता को भी उजागर करते हैं। वक्ताओं ने कहा कि स्व. घनश्याम मिश्र जी ने यह सिद्ध कर दिया कि भोजपुरी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि विचार, दर्शन और विधि की भी समर्थ भाषा है।

श्रद्धांजलि सभा में प्रमुख रूप से मनीष कुमार शुक्ला (ADJ बक्सर), प्रधान न्यायधीश मनोज कुमार, संजीत कुमार, अनुपमा कुमारी(ADJ बक्सर), नेहा त्रिपाठी(ADJ बक्सर), भोला सिंह (सब जज), जुबेनाइल जज हर्षवर्धन सिंह एवं महासचिव अधिवक्ता संघ बिन्देश्वरी पाण्डेय उर्फ़ पप्पू पाण्डेय, अधिवक्ता रामनाथ ठाकुर, अधिवक्ता शशिकांत उपाध्याय, अधिवक्ता हृदय नारायण मिश्रा, अधिवक्ता पुर्नेदू कुमार मिश्रा, दिव्य प्रकाश शर्मा, अधिवक्ता सुमन प्रकाश पाण्डेय, अधिवक्ता अनिल पाण्डेय अधिवक्ता, मनीष पाठक, केदार नाथ सिंह अधिवक्ता अरुण कुमार ओझा एवं उनके सुपुत्र डॉ कन्हैया मिश्रा, कपिंन्द्र किशोर सहित ज़िला अधिवक्ता संघ के वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिवक्ता, साहित्यकार, शिक्षाविद, समाजसेवी, बुद्धिजीवी वर्ग तथा स्व. मिश्र जी के शिष्यगण एवं शुभचिंतक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर स्व. घनश्याम मिश्र जी की पुण्यात्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उनके सुपुत्र अधिवक्ता संजय मिश्रा ने पिता द्वारा रचित गीता अनुवाद का पाठ कर श्रोताओं का मन मुग्ध कर दिया वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि ऐसे व्यक्तित्व कालजयी होते हैं—जो अपने जाने के बाद भी अपने विचारों, शब्दों और कर्मों के माध्यम से समाज को सतत प्रेरणा देते रहते हैं। सभा में यह संकल्प भी लिया गया कि स्व. मिश्र जी के न्यायप्रिय, साहित्यसेवी और लोक कल्याणकारी विचारों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाया जाएगा।
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