OTHERS

आशा कार्यकर्ताओं का फूटा आक्रोश : 6 माह से प्रोत्साहन राशि बंद, 23 फरवरी को पटना मार्च की चेतावनी

10 ट्रेड यूनियनों के समर्थन में सिविल सर्जन कार्यालय पर प्रदर्शन, 13 सूत्री मांग पत्र सौंपा — अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा के संकेत

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
बक्सर जिला में आशा एवं आशा फैसिलिटेटर कार्यकर्ताओं ने 10 ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर गुरुवार को हड़ताल में शामिल होकर सिविल सर्जन कार्यालय के समक्ष आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की और सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध जताया।

 

प्रदर्शन का नेतृत्व आशा एवं आशा फर्स्ट लेटर संघ के राज्य उपाध्यक्ष सह जिला संयोजक अरुण कुमार ओझा, चिकित्सा संघ के राज्य उपाध्यक्ष मनोज चौधरी, महावीर पंडित, मीरा कुमारी एवं डैजी देवी ने संयुक्त रूप से किया। प्रदर्शन के उपरांत आयोजित सभा की अध्यक्षता मीरा कुमारी एवं डैजी देवी ने की, जबकि संचालन अरुण कुमार ओझा ने किया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आशा एवं आशा फैसिलिटेटर स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं, यह बात राज्य सरकार, विश्व स्वास्थ्य संगठन और माननीय उच्च न्यायालय तक स्वीकार कर चुके हैं। इसके बावजूद विगत 6 माह से प्रोत्साहन राशि का भुगतान लंबित रखना घोर मानव एवं मजदूर विरोधी कदम है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा आवंटित 57 कार्यों के अतिरिक्त आशा कार्यकर्ताओं से शराबबंदी अभियान, घरेलू कलह रोकना, किसानों का निबंधन, आयुष्मान कार्ड बनवाना समेत कई अतिरिक्त कार्य लिए जा रहे हैं, लेकिन इसके अनुरूप उन्हें पारिश्रमिक नहीं दिया जा रहा है।

 

सभा में चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो 23 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री, बिहार सरकार के समक्ष राज्य स्तरीय प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस दौरान अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा भी की जा सकती है। प्रदर्शन के दौरान प्रमुख मांगें चार लेबर कोड रद्द करते हुए आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को श्रम कानूनों के अधीन लाया जाए। 6 माह से लंबित प्रोत्साहन राशि का अविलंब एकमुश्त भुगतान किया जाए। सेवानिवृत्ति की आयु आंगनबाड़ी सेविका/सहायिका की तरह 65 वर्ष की जाए। मुख्यमंत्री द्वारा घोषित ₹2000 बढ़ी हुई प्रोत्साहन राशि सीधे खाते में सुनिश्चित की जाए। आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को तृतीय वर्ग के कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। इन मांगों सहित 13 सूत्री मांग पत्र कार्यपालक निदेशक, बिहार पटना को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन, बक्सर के माध्यम से सौंपा गया। शिष्टमंडल में अरुण कुमार ओझा, मनोज चौधरी, महावीर पंडित, डैजी कुमारी, मंजू कुमारी, मीरा कुमारी, दुर्गावती देवी सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे। कार्यक्रम का समापन गगनभेदी नारों के साथ हुआ और 23 फरवरी को पटना मार्च का आह्वान करते हुए सभा की कार्रवाई समाप्त की गई।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button