सरकार की धान अधिप्राप्ति नीति किसान विरोधी है – नीरज कुमार


न्यूज विज़न। बक्सर
भाकपा-माले लीडर एवं मड़ियाँ पैक्स अध्यक्ष नीरज कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि राज्य में चल रही धान अधिप्राप्ति व्यवस्था सरकार की किसान विरोधी नीतियों का प्रत्यक्ष उदाहरण बन चुकी है । केंद्र की भाजपा‑मोदी सरकार ने बिहार के साथ सौतेला व्यवहार करते हुए धान खरीद लक्ष्य को पिछले वर्ष की तुलना में 25% घटा दिया है । जब राज्य में इस वर्ष पैदावार काफी बेहतर हुई है, तब 10 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य कम कर देना किसानों की मेहनत और अधिकारों का अपमान है । यह स्थिति तब है जब सरकार द्वारा कुल धान उत्पादन का एक चौथाई भाग ही सरकार द्वारा ख़रीदा जाता है । बिहार की सरकार इसका विरोध कर किसानों की हक़ की मांग करने तथा किसानों की समस्याओं का निदान करने की जगह उन्हें बदतर हालत में धकेल कर असहाय रूप से देख रही है ।
बक्सर जिले में भी धान खरीद का लक्ष्य भी 25% घटाया गया है, जबकि नावानगर प्रखंड का लक्ष्य आधा कर दिया गया है । लक्ष्य घटने के कारण पैक्स समितियाँ ज्यादातर किसानों का धान सरकारी दर पर खरीदने में असमर्थ हैं, जिससे किसानों को अपने अनाज औने‑पौने दामों पर व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है । छोटे‑मझोले किसान जो अपने स्तर बोरा, पलदारी व अन्य व्यवस्था कर धान पैक्स क्रय केंद्र तक नहीं ला पाते, ऐसे ज्यादातर किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बेच पाना लगभग असंभव है ।
ऐसी स्थिति में पूरा सरकारी तंत्र पैक्स अध्यक्षों पर सारी जिम्मेदारी थोपकर अपनी असफलता छिपाने की कोशिश कर रहा है । पैक्स अध्यक्ष किसानों से धान खरीदकर दो दिन के भीतर भुगतान कर देते हैं, लेकिन जब बिहार राज्य खाद्य निगम सीएमआर चावल प्राप्त होने के छह‑छह माह बाद तक भुगतान नहीं करता जिससे पैक्स समितियाँ भारी आर्थिक संकट में फँस जाती हैं । पैक्स समितियों को धान खरीदारी के लिए लगभग 11% ब्याज दर पर कैश क्रेडिट लेना पड़ता है ऐसे में महीनों तक भुगतान नहीं मिलना आर्थिक अन्याय है ।
कई पैक्स अध्यक्षों ने समितियों को डिफॉल्टर होने से बचाने के लिए अपनी जमीन-जायदाद तक बेच दी है । फिर भी सरकार पैक्स अध्यक्षों को दोषी बताकर किसानों और समितियों को आपस में भिड़ाने का प्रयास कर रही है । धान मिलिंग, परिवहन और संबद्ध कार्यों का भुगतान अभी भी पैक्स समितियों को दशकों पुराने दर पर ही किया जा रहा है, जिससे समितियाँ लगातार घाटे में जा रही हैं ।
पैक्स समितियों की केंद्र और राज्य सरकार से माँग है कि :
1. धान खरीद लक्ष्य को तत्काल बढ़ाए ।
2. बिहार राज्य खाद्य निगम द्वारा किसानो के धान की तरह ही सीएमआर चावल प्राप्त होने के दो दिनों की समयसीमा के भीतर भुगतान सुनिश्चित करे ।
3. कैश क्रेडिट के ब्याज दर को सरकार वहन करे और पैक्स समितियों को धान अधिप्राप्ति के लिए ब्याजमुक्त कैश क्रेडिट दिया जाए ।
4. पैक्स अध्यक्षों के लिए प्रोत्साहन राशि बढ़ाई जाए और समितियों को हो रहे घाटे की भरपाई की जाए ।
सरकार की मौजूदा नीतियाँ किसानों को समर्थन मूल्य से दूर कर रही हैं और पैक्स समितियों को कमजोर बना रही हैं । यह नीति किसान विरोधी ही नहीं, बल्कि बिहार के प्रति केंद्र सरकार की उपेक्षा का प्रतीक है । किसानों के सम्मान और अधिकारों के लिए हम हर स्तर पर संघर्ष करेंगे ।





