राष्ट्रीय लोक अदालत में टूटी रिश्तों की डोर फिर जुड़ी, 14 वैवाहिक मामलों का हुआ समझौता
बक्सर व्यवहार न्यायालय में कुटुंब न्यायालय की पहल से पति-पत्नी के बीच सुलह, गले मिलकर साथ रहने को हुए राजी


न्यूज विज़न। बक्सर
बक्सर व्यवहार न्यायालय में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान कुटुंब न्यायालय के प्रयास से कई टूटते परिवारों को नई शुरुआत मिली। इस दौरान कुल 14 वैवाहिक (मेट्रिमोनियल) मामलों का सफलतापूर्वक निस्पादन कराया गया।
लोक अदालत में वाद संख्या 151/20 सहित कई मामलों की सुनवाई करते हुए कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश मनोज कुमार के प्रयास से पति-पत्नी के बीच आपसी सुलह-समझौता कराया गया। प्रमुख मामलों में धीरेंद्र कुमार व रीना सिंह, रविकांत सिंह व अनिता देवी तथा गायत्री कुमारी व विश्वामित्र वर्मा के बीच चल रहे विवादों को मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाया गया।
सुनवाई के बाद दोनों पक्षों ने आपसी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाया और साथ रहने पर सहमति जताई। पति अपनी पत्नी को अपने साथ घर ले गए। इस समझौते से परिवार के साथ-साथ उनके बच्चों के भविष्य को भी एक नई दिशा मिली, क्योंकि अब उन्हें माता-पिता दोनों का स्नेह और संरक्षण मिल सकेगा।
मध्यस्थता की प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों के परिवारजन भी मौजूद रहे और उन्होंने इस निर्णय का सहर्ष स्वागत किया। पत्नी ने भी सभी परिजनों के सामने अपने पति के साथ ससुराल जाने की सहमति दी, जिससे पूरे माहौल में भावुक और सकारात्मक माहौल बन गया।
इस सफल पहल का श्रेय कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश मनोज कुमार के अथक प्रयासों को दिया जा रहा है, जिनकी पहल से कई बिखरते परिवारों को फिर से जोड़ने में सफलता मिली।
इस अवसर पर प्रधान जिला जज काजल झांव, सचिव नेहा दयाल, पैनल अधिवक्ता रामानंद मिश्रा, दिनदयाल कुंवर तथा राहुल नारायण समेत अन्य लोग मौजूद रहे।





