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श्रीराम का जीवन केवल एक कथा नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है: बैकुंठ जी महाराज

लाल बाबा के आश्रम में चल रहे श्री राम कथा के तीसरे दिन स्वामी महाराज जी ने राम जन्म का किया वर्णन

न्यूज विजन। बक्सर
लाल बाबा आश्रम सती घाट बक्सर में पूज्य लाल बाबा सरकार के 19वें निर्वाण दिवस पर आयोजित नव दिवसीय श्रीराम कथा पूज्य श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज के कृपा पात्र जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री बैकुंठनाथ जी महाराज पीठाधीश्वर मायामधुसूदनधाम, हरिद्वार ने श्री राम कथा का श्रवण कराया। श्री राम कथा के तीसरे दिन मंगलवार को श्री राम जी के जन्म की कथा सुनाई। आश्रम के महंत श्री सुरेन्द्र जी महाराज ने सभी नगर वासियों से निवेदन किया कि श्रीराम कथा का लाभ उठावें।

 

महराज जी ने कहा कि धर्म उनकी रक्षा करता है जो धर्म की रक्षा करते हैं। स्वामी जी महाराज ने बताया कि सम्पूर्ण राज्य में आनन्द मनाया जाने लगा। महाराज के चार पुत्रों के जन्म के उल्लास में गन्धर्व गान करने लगे और अप्सराएं नृत्य करने लगीं। देवता अपने विमानों में बैठ कर पुष्प वर्षा करने लगे। महाराज ने उन्मुक्त हस्त से राजद्वार पर आए भाट, चारण तथा आशीर्वाद देने वाले ब्राह्मणों और याचकों को दान दक्षिणा दी। पुरस्कार में प्रजा-जनों को धन-धान्य तथा दरबारियों को रत्न, आभूषण प्रदान किए गए। कथा में प्रभु श्री राम का जन्म होते ही पंडाल में मौजूद सभी महिला पुरुष श्रद्धालु जय श्री राम का जयघोष करने लगे। पूरा माहौल राममय हो गया।

 

चारों पुत्रों का नामकरण संस्कार महर्षि वशिष्ठ के द्वारा किया गया तथा उनके नाम रामचन्द्र, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखे गए। श्रीराम का जीवन केवल एक कथा नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है, जिससे हम जीवन में आदर्श व्यवहार, संयम, और सत्य की राह पर चलने की सीख ले सकते हैं। श्रीराम त्रेतायुग में अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के पुत्र थे।

महाराज जी ने कहा कि प्रभु श्री राम विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं, जिनका जन्म पृथ्वी से अधर्म और असत्य को समाप्त करने के लिए हुआ था। मौके पर युवा जदयू के प्रदेश महासचिव आजाद सिंह राठौर, नीरज सिंह, झूना पांडेय, पुना बाबा, रणधीर श्रीवास्तव, दुर्गेश पांडेय, प्रह्लादजी, मनोज वर्मा, अंजय दुबे, संतोष गुप्ता, बबलू तिवारी, वीर राय, बिनोद जायसवाल, संतोष शर्मा, सुरेन्द्र वर्मा, ललन मिश्रा समेत काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्री राम कथा का श्रवण किया।

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