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तीन साल बाद थाने के मालखाना से बाहर निकले भगवान 

ढकाइच राम जानकी मठ से गायब रामदरबार की अष्टधातु की सात प्राचीन मूर्तियां कोइलवर थाना से हुयी मुक्त 

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
जिले के कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र अंतर्गत ढकाइच राम जानकी मठ से गायब रामदरबार की अष्टधातु की सात प्राचीन मूर्तियां करीब तीन साल के इंतजार के बाद आखिरकार भोजपुर जिले के कोईलवर थाना के मालखाना से मुक्त कर संबंधित मंदिर को सौंप दी गईं। मंगलवार को सीजेएम न्यायालय में छह लाख रुपये के बेल बांड भरने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मूर्तियों को औपचारिक रूप से रिहा किया गया।

 

रिहाई के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मूर्तियों को बक्सर जिले के कृष्णब्रह्म थाना क्षेत्र स्थित बड़का धकाईच के राम जानकी मठ के लिए रवाना किया गया। इस अवसर पर मठ के सचिव कन्हैया दुबे, सुधीर दुबे, रौशन पांडेय, नवीन कुमार सिंह तथा अधिवक्ता धनेश पांडेय मौजूद रहे। तीन वर्षों तक मालखाना में सुरक्षित रखी गईं इन मूर्तियों की वापसी की खबर से रामभक्तों में खासा उत्साह देखा गया। अधिवक्ता धनेश पांडेय ने बताया कि बरामद अष्टधातु की मूर्तियां अत्यंत प्राचीन और बेशकीमती हैं। उन्होंने बताया कि ये मूर्तियां लगभग 300 वर्ष पुरानी हैं तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी अनुमानित कीमत करीब 68 करोड़ रुपये आंकी गई है।

 

गौरतलब है कि 21 जनवरी 2023 को बक्सर जिले के कृष्णब्रह्म थाना क्षेत्र के बड़की धकाईच स्थित राम जानकी मठ से भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता, हनुमान, लड्डू गोपाल सहित सात मूर्तियां और एक मुकुट चोरी कर लिया गया था। हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 22 जनवरी 2023 की अहले सुबह आरा-छपरा मोड़ के पास एक कार से सभी मूर्तियां बरामद कर ली थीं। इस दौरान एक देशी कट्टे के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार भी किया गया था।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 6 जून 2011 को भी राम जानकी मठ में चोरी की घटना हुई थी, जिसमें तीन मूर्तियां चोरी कर ली गई थीं और पुजारी भुनेश्वर दास की हत्या कर दी गई थी। उस मामले में तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। चोरी गई मूर्तियां वर्ष 2013 में कोईलवर थाना क्षेत्र से बरामद हुई थीं, जिन्हें बाद में विधिवत प्रक्रिया के तहत मुक्त कर पुनः मठ में स्थापित किया गया था। राम जानकी मठ के सचिव कन्हैया दुबे ने बताया कि करीब 300 वर्ष पूर्व नेपाल के महाराजा द्वारा इन मूर्तियों की स्थापना कराई गई थी। अब तीन साल बाद मूर्तियों की वापसी से मठ परिसर में एक बार फिर धार्मिक उत्साह का माहौल है और पुनः स्थापना की तैयारी की जा रही है।

 

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