डॉ रामकेवल ने कहा -मसूर की खेती में पोषक तत्व प्रबंधन से होगी अधिक उपज
मसूर दाल फसल पर नियाजीपुर गांव में प्रक्षेत्र दिवस कार्यक्रम का हुआ आयोजन


न्यूज विजन। बक्सर
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् का पूर्वी की ओर से मंगलवार को बक्सर जिले के सिमरी प्रखंड अंतर्गत नियाजीपुर में मसूर फसल के वैज्ञानिक विधि से खेती द्वारा सफल उत्पादन पर प्रक्षेत्र दिवस मनाया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के महत्वकांक्षी परियोजना ”भारत में दालों की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए आदर्श दलहन ग्राम दृष्टिकोण का लाभ उठाना” के अंतर्गत माडल दलहन ग्राम के अंतर्गत किया गया।
केविके विशेषज्ञ डॉ रामकेवल ने बताया कि बक्सर के दियारा क्षेत्र नियाजीपुर एवं बड़का राजपुर में बृहद स्तर पर मसूर की खेती होती है। लेकिन, अधिक बीज दर, छिटकवा बुवाई, बीज शोधन न करने एवं पोषक तत्वों के समुचित प्रबंधन के सम्पूर्ण जानकारी न होने के कारण अपेक्षित उपज प्राप्त नहीं होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए नियाजीपुर में लगभग 40 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्रदर्शन कराया गया है। किसानों को संस्तुत बीज दर (16 किलोग्राम प्रति एकड़ ), बीज शोधन, पंक्ति में बुवाई, समेकित कीट प्रबंधन एवं पोषक तत्व के प्रबंधन के विषय में जागरूक किया गया।
कृषि विज्ञान केन्द्र के विशेषज्ञ डॉ. रामकेवल ने बताया कि मसूर बिहार का एक बहुत ही महतवपूर्ण दलहन फसल है जिसका उपयोग दाल, नमकीन दालमोट आदि बनाने में प्रयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि मसूर के साथ मटर, चना, तीसी, खेसारी आदि की अक्टूबर माह में पंक्ति में बुवाई करने से अधिक उपज प्राप्त होती है तथा रोग एवं व्याधि कम लगते है।
प्रक्षेत्र दिवस कार्यक्रम में कृषि समन्वयक रामपुकार तिवारी, नियाजीपुर के किसान भुनेस्वर यादव, मोहन यादव, राजेश यादव, शिवजी यादव, रितेश यादव, ओमशंकर यादव, रमण यादव, रामनाथ ठाकुर, छोटक गोंड, रीमा देवी, बिजंती देवी सहित 104 किसानों ने हिस्सा लिया।





