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अच्छी पहल: केविके 15 ग्रामीण युवतियों को दिला रहा सिलाई-कटाई प्रशिक्षण

कृषि विज्ञान केन्द्र में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का स्थानीय सांसद सुधाकर सिंह ने किया शुभारंभ

न्यूज विजन। बक्सर

ग्रामीण युवतियों को सिलाई प्रशिक्षण के माध्यम से कौशल उन्नयन कर स्वरोजगार द्वारा आय अर्जन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लालगंज स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र की ओर से तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ शनिवार को किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि सांसद सुधारकर सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत के समूह गायन के साथ हुआ। आमंत्रित अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रमुख डॉ देवकरन ने कृषि विज्ञान केन्द्र की गतिविधियों की संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने प्रशिक्षण के महत्व पर प्रतिभागियों का ज्ञान वर्द्धन किया।

 

 

सांसद सुधाकर सिंह ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लाभ अर्जित करने की बात कही। साथ ही कृषि व संबंद्ध क्षेत्रों मे मशीनीकरण की उपयोगिता पर बल देते हुए नये प्रयोगों की बात कही। मुख्य प्रशिक्षक डॉ रामकेवल ने बताया कि अनुसूचित जाति उपयोजना अन्तर्गत यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम मे कुल 15 महिला प्रशिक्षणार्थियों को विभिन्न प्रकार के वस्त्र के लिए माप, कटाई व सिलाई की व्यवहारिक, मशीन का रखरखाव, आदि की जानकारी दक्ष प्रशिक्षकों के माध्यम से दिलाई जा रही है ।

 

 

सीमांत एवं भूमिहीन किसानों के जीविकोपार्जन को बढ़ावा देने एवं आय अर्जन हेतु बकरी पालन के लिए ब्लैक बंगाल नस्ल की तकनीकी जानकारी देकर प्रदर्शन मे बकरियों का वितरण सांसद सुधारकर सिंह के द्वारा गुरूदासमठिया, नाथपुर, हुकहाँ एवं सोंधिला के 14 किसानों को उपलब्ध कराया गया। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना संस्थान के सौजन्य से आयोजित किया गया।
कृषि विज्ञान केन्द्र, बक्सर के वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रमुख डॉ देवकरन ने जानकारी दी कि ब्लैक बंगाल प्रजाति कि बकरियां मांस एवं दुग्ध उत्पादन हेतु उपयुक्त होती हैं। छोटे कद वाले इन प्रजातियों का रंग मुख्यतः काला एवं भुरा होता है। 8 से 10 महीने मे वयस्क होकर 2 से 3 बच्चे को जन्म देती हैं। नर का वजन 25 से 30 किलोग्राम तथा मादा का 20 से 25 किलोग्राम होता है तथा किसी भी वातावरण के प्रति अनुकूल होते हैं।

 

 

राष्टीय खाद्य तिलहन मिशन के अन्तर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र, बक्सर द्वारा इंदौर में सरसों उत्पादन तकनीकी पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। कृषि विज्ञान केन्द, बक्सर के विशेषज्ञ एवं जिलें मे कार्यक्रम के नोडल अधिकारी हरिगोबिन्द ने बताया कि तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अच्छी गुणवत्ता का बीज, समय से बुआई, खरपतवार प्रबंधन, सिंचाई, पोषक तत्व प्रबंधन एवं कीट व व्याधियों के नियंत्रण करके अधिक उपज प्राप्त किया जा सकता है तथा लागत को कम करके अधिक आय अर्जित किया जा सकता है । उन्होंने बताया कि मिशन के तहत रबी मौसम मे जिले के 300 हेक्टेयर क्षेत्रफल मे सरसों की उन्नत प्रजाति के साथ साथ तकनीकी का प्रदर्शन किया गया है। इंदौर कलस्टर मे 40 किसानों के 15 हेक्टेयर क्षेत्रफल मे प्रजाति आरएच- 725 का प्रदर्शन किया गया है।
उन्होंने बताया कि इस प्रभेद की उपज क्षमता 24 से 25 क्विंटल प्रति हेक्येयर एवं तेल की मात्रा 38 से 40 प्रतिशत होती है, जिससे किसान अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। मौके पर उप परियोजना निदेशक, आत्मा रणधीर सिंह ने किसानों को तकनीकी जानकारी देते हुए उत्पादित बीज को अन्य किसानों को उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। कार्यक्रम मे सौ से अधिक महिला एवं

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